साल 2026 के पहले नौ महीनों में Delhi NCR के रियल एस्टेट मार्केट में संस्थागत निवेश (Institutional Investment) **178%** उछलकर **$581.7 मिलियन** पर पहुंच गया है। जहां ऑफिस स्पेस के लिए निवेशकों में भारी उत्साह है, वहीं आवासीय बाजार में कीमतें **12%** बढ़ने के बावजूद बिक्री में **1%** की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
ऑफिस स्पेस पर निवेशकों का दांव
दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों की रुचि का मुख्य केंद्र 'Grade A' ऑफिस स्पेस बने हुए हैं। निवेशक ऐसी ऑपरेशनल प्रॉपर्टीज की तलाश में हैं, जो उन्हें नियमित आय (Income-generating) दे सकें और बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करें। यह ट्रेंड एक बड़े राष्ट्रीय बदलाव का हिस्सा है, जहां कुल रियल एस्टेट फंडिंग $5.9 बिलियन तक पहुंच गई है।
इस उछाल के पीछे घरेलू निवेशकों का हाथ सबसे बड़ा है, जिनका कुल संस्थागत कैपिटल में 60% हिस्सा है। अब बड़े प्लेयर्स सिंगल प्रॉपर्टी के बजाय 'मल्टी-सिटी प्लेटफॉर्म्स' पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो कुल निवेश का लगभग 50% हिस्सा है।
आवासीय बाजार में अजीब विरोधाभास
कमर्शियल सेक्टर की सफलता के उलट, आवासीय सेक्टर में एक अलग ही कहानी दिख रही है। तीसरी तिमाही में दिल्ली-एनसीआर में घरों की कीमतें सालाना आधार पर 12% बढ़ी हैं, जो भारत के सात बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। हालांकि, यह उछाल खरीदारी में तब्दील नहीं हो पाया। तिमाही के दौरान हाउसिंग सेल्स 1% गिरकर 13,765 यूनिट्स रही, जो बढ़ती कीमतों और खरीदारों की जेब के बीच के अंतर को दर्शाता है।
आगे क्या हैं चुनौतियां?
डेवलपर्स के लिए जमीन और निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत मार्जिन पर दबाव डाल रही है। साथ ही, लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट में 'इन्वेंट्री ओवरहैंग' (Inventory Overhang) का रिस्क बना हुआ है। यदि डिमांड सप्लाई के साथ कदमताल नहीं कर पाई, तो आने वाले समय में नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने की गति पर ब्रेक लग सकता है। निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या घरेलू कैपिटल का प्रवाह इस मार्केट को सहारा दे पाएगा या फिर डिमांड और सप्लाई का यह अंतर बाजार को ठंडा कर देगा।
