Delhi-NCR के प्रीमियम हाउसिंग मार्केट में प्रॉपर्टी के दाम पिछले क्वार्टर में **12%** तक बढ़ गए हैं। अब औसतन रेट **₹9,980** प्रति वर्ग फीट के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे निवेशकों को अब केवल कीमत ही नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म में आने वाले खर्चों पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
Delhi-NCR के प्रीमियम हाउसिंग सेक्टर में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रॉपर्टी के दामों में 12% की तेजी दर्ज की गई है, जिससे औसत कीमत ₹9,980 प्रति वर्ग फीट पर पहुंच गई है। हालांकि, मार्केट जानकारों का मानना है कि केवल ऊंचे दामों को देखकर फैसला लेना गलत हो सकता है क्योंकि यह जरूरी नहीं कि महंगा घर लॉन्ग-टर्म में अच्छा रिटर्न ही दे।
लग्जरी सुविधाओं का असली खर्च
कीमतों में इस उछाल के पीछे प्राइवेट क्लब, वेलनेस सेंटर और शानदार लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं मुख्य कारण हैं। ये चीजें मार्केटिंग के लिए तो अच्छी हैं, लेकिन अगर इनका डेली इस्तेमाल कम हो, तो ये मेंटेनेंस के बोझ में बदल जाती हैं। अगर कोई डेवलपर हैंडओवर के बाद इन फाइव-स्टार सुविधाओं को बनाए नहीं रख पाता, तो शुरुआत में जो चीज प्लस पॉइंट दिख रही थी, वह बाद में एक बड़ी फाइनेंशियल लायबिलिटी बन जाती है।
असली रिटर्न का आकलन कैसे करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल खरीदने की कीमत नहीं, बल्कि 10 साल की ओनरशिप कॉस्ट देखनी चाहिए। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, इंश्योरेंस, हाई यूटिलिटी बिल और बड़े रिपेयर के लिए जरूरी 'सिंकिंग फंड्स' को भी जोड़ना चाहिए। रेंटल मार्केट में भी लग्जरी सुविधाएं हमेशा ज्यादा कमाई की गारंटी नहीं देतीं। असली रिटर्न का पता तो 'नेट रेंटल यील्ड' से चलता है—यानी मेंटेनेंस और वैकेंसी कॉस्ट काटने के बाद जो मुनाफा हाथ में आए, वही असली कमाई है।
डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड है सबसे जरूरी
सिर्फ पुराने प्रोजेक्ट्स की सफलता को देखकर किसी नए प्रोजेक्ट में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी प्रोजेक्ट की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करती है कि डेवलपर सेल के बाद प्रॉपर्टी को मेंटेन करने में कितना सक्षम है। रियल एस्टेट स्टॉक्स या निवेश के लिए उन डेवलपर्स को प्राथमिकता दें जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा हो। आज के समय में, क्वालिटी और मेंटेनेंस बरकरार रखने वाले डेवलपर्स ही लॉन्ग-टर्म में कॉम्पिटिटिव एडवांटेज साबित होंगे।
