जुलाई-सितंबर **2026** की तिमाही में दिल्ली-एनसीआर में घरों की कीमतें **12%** बढ़कर **₹9,980** प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई हैं। लक्जरी हाउसिंग की तरफ डेवलपर्स का झुकाव बढ़ा है, लेकिन नई लॉन्चिंग में **14%** की गिरावट बाजार की बदलती तस्वीर को दर्शाती है।
दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट ने इस साल जबरदस्त तेजी दिखाई है। साल-दर-साल आधार पर यहां कीमतों में 12% का इजाफा दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा भारत के सात प्रमुख प्रॉपर्टी बाजारों में सबसे अधिक है, जबकि अन्य बड़े शहरों में औसत बढ़त केवल 7% रही है।
लक्जरी हाउसिंग पर फोकस
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह बाजार में आया स्ट्रक्चरल बदलाव है। डेवलपर्स अब बजट और मिड-सेगमेंट घरों के बजाय प्रीमियम और लक्जरी प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस तिमाही में कुल नई सप्लाई में 34% से ज्यादा हिस्सेदारी उन प्रोजेक्ट्स की रही जिनकी कीमत ₹2.5 करोड़ से ऊपर है। बढ़ती जमीन की लागत और कंस्ट्रक्शन मटेरियल के महंगे होने के कारण कंपनियां अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए यह रणनीति अपना रही हैं।
बिक्री और लॉन्चिंग का गणित
कीमतें तो बढ़ रही हैं, लेकिन मार्केट की रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ती दिख रही है। दिल्ली-एनसीआर में नए प्रोजेक्ट लॉन्च 14% घटकर 10,900 यूनिट्स रह गए हैं। वहीं, रेजिडेंशियल सेल्स में 1% की मामूली गिरावट देखी गई और यह 13,765 यूनिट्स पर रही। यह साफ संकेत है कि बाजार की ग्रोथ अभी वॉल्यूम के बजाय कीमतों के बढ़ने पर ज्यादा निर्भर है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
विशेषज्ञों का मानना है कि लक्जरी सेगमेंट पर ज्यादा निर्भरता डेवलपर्स के लिए जोखिम भरी हो सकती है, खासकर तब जब मिड-मार्केट खरीदारों की अनदेखी की जा रही हो। गुरुग्राम जैसे माइक्रो-मार्केट में सट्टेबाजी (speculative demand) के चलते कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यदि भविष्य में लक्जरी प्रॉपर्टी की मांग सुस्त पड़ती है, तो इसका सीधा असर डेवलपर्स के मुनाफे पर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में यह देखना होगा कि लक्जरी डिमांड कितनी सस्टेनेबल रहती है और क्या डेवलपर्स दोबारा किफायती घरों की ओर रुख करते हैं।
