20 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर 'Delhi Master Plan 2047' को नोटिफाई कर दिया गया है। इस मास्टर प्लान का लक्ष्य दिल्ली में **40 लाख** नए घर बनाना और **200 वर्ग किलोमीटर** क्षेत्र का विस्तार करना है।
मास्टर प्लान 2047 का रोडमैप
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) ने अगले दो दशकों के लिए राजधानी के शहरी विकास का खाका खींच दिया है। 3.2 करोड़ की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखते हुए, यह प्लान अब लो-राइज निर्माण के बजाय हाई-डेंसिटी और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट पर जोर देगा।
क्या है बड़ा बदलाव?
इस नीति का मुख्य केंद्र Transit-Oriented Development (TOD) है, जो मेट्रो स्टेशनों और बस कॉरिडोर के आसपास निर्माण को प्राथमिकता देगा। इसके अलावा, 200 वर्ग किलोमीटर में फैली 'लैंड पूलिंग' नीति के जरिए छोटे और बिखरे हुए भूखंडों को जोड़कर बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएंगे। सरकार ने पुनर्विकास नियमों को आसान बनाते हुए न्यूनतम प्लॉट साइज घटाकर 3,000 वर्ग मीटर कर दिया है।
डेवलपर्स की बदली रणनीति
बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अब इस फ्रेमवर्क के साथ तालमेल बिठा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Max Estates ने पश्चिमी दिल्ली में शेयर-स्वैप मैकेनिज्म के जरिए जमीन अधिग्रहण शुरू किया है, ताकि वे नए एक्सपेंशन कॉरिडोर का हिस्सा बन सकें। कंपनियां अब कैश-हैवी खरीदारी के बजाय पूंजी-कुशल (Capital-efficient) मॉडल अपना रही हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह प्लान शानदार दिख रहा है, लेकिन मुख्य चुनौती 'एग्जीक्यूशन' की है। दिल्ली की जटिल प्रशासनिक व्यवस्था के कारण परियोजनाओं में देरी की संभावना बनी रहती है। निवेशकों को अब केवल सरकारी घोषणाओं पर नहीं, बल्कि Urban Extension Road-II (UER-II) कॉरिडोर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अप्रूवल की गति पर नजर रखनी चाहिए।
