Delhi Master Plan 2047 के तहत अब नए फार्महाउस बनाने के लिए न्यूनतम **10,000 वर्ग मीटर** (लगभग **2.47 एकड़**) जमीन होना अनिवार्य कर दिया गया है। **20 अगस्त 2026** को जारी इस नोटिफिकेशन ने लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट की पूरी तस्वीर बदल दी है।
कड़े नियमों से बढ़ी चुनौती
20 अगस्त 2026 को अधिसूचित दिल्ली मास्टर प्लान 2047 ने शहर के लो-डेंसिटी रेजिडेंशियल मार्केट में हलचल मचा दी है। बाजार को उम्मीद थी कि सरकार 4,000 वर्ग मीटर (एक एकड़) के प्लॉट्स को मंजूरी देगी, लेकिन नए नियमों ने इसे दोगुने से भी ज्यादा कर दिया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की सख्त शर्तें
सिर्फ प्लॉट का साइज ही नहीं, सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के भी कड़े मानदंड तय किए हैं। अब किसी भी नए डेवलपमेंट के लिए सड़क की चौड़ाई कम से कम 18 मीटर होनी चाहिए। इसके अलावा, फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) को 10 पर सीमित रखा गया है, ग्राउंड कवरेज 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता और बिल्डिंग की अधिकतम ऊंचाई 10 मीटर तय की गई है।
प्रॉपर्टी मार्केट पर असर
इन नियमों के लागू होने से रियल एस्टेट मार्केट दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है: कंप्लायंट (Compliant) और नॉन-कंप्लायंट (Non-compliant) प्रॉपर्टीज। नई लीगल इन्वेंट्री की सप्लाई में भारी गिरावट आने की संभावना है। आर्थिक दृष्टि से देखें, तो जो प्रॉपर्टीज पहले से इन मानदंडों को पूरा करती हैं, उनकी वैल्यू में अब भारी उछाल आ सकता है क्योंकि उन्हें दोबारा बनाना लगभग नामुमकिन होगा।
निवेश का जोखिम और सावधानी
छोटे प्लॉट मालिकों के लिए यह एक बड़ा झटका है। जो जमीनें इन नए मानकों—खासकर 10,000 वर्ग मीटर और 18 मीटर सड़क चौड़ाई की शर्तों—को पूरा नहीं करती हैं, वे 'स्ट्रैंडेड एसेट्स' (Stranded Assets) बन सकती हैं। साउथ और साउथ-वेस्ट दिल्ली में जमीन खरीदने या निवेश करने वाले खरीदारों को अब ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि नियमों के उल्लंघन की कीमत अब बहुत महंगी साबित हो सकती है।
