Indian Real Estate: ऑफिस स्पेस को पछाड़कर 'Data Centers' बने निवेशकों की पहली पसंद

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Real Estate: ऑफिस स्पेस को पछाड़कर 'Data Centers' बने निवेशकों की पहली पसंद

साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में **$6.1 बिलियन** का प्राइवेट इक्विटी निवेश आया है। इसमें डेटा सेंटर्स ने बाजी मारते हुए **$2.5 बिलियन** जुटाए हैं, जो डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।

निवेश की बदलती दिशा

प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर्स ने अब पारंपरिक ऑफिस स्पेस से अपना ध्यान हटाकर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर केंद्रित कर लिया है। इस साल के पहले 9 महीनों में कुल 55 सौदों के जरिए $6.1 बिलियन का निवेश हुआ। यह ट्रेंड बताता है कि अब मार्केट में डेटा सेंटर्स का दबदबा बढ़ गया है, जबकि ऑफिस स्पेस में निवेश $1.7 बिलियन तक सीमित रहा।

डेटा सेंटर्स का बढ़ता महत्व

कुल निवेश का 40% हिस्सा अकेले डेटा सेंटर्स को मिला है। क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे एक सुरक्षित और लंबी अवधि का निवेश माना जा रहा है। देश में डेटा क्षमता में इस साल 30% की उछाल आई है, जिससे यह 2,200 MW के आंकड़े पर पहुंच गई है।

भौगोलिक एकाग्रता और चुनौतियां

मौजूदा निवेश का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा शहरों में केंद्रित है। कुल क्षमता का 53% हिस्सा मुंबई में है, जबकि चेन्नई 20% के साथ दूसरे स्थान पर है। हालांकि, यह एकाग्रता पावर ग्रिड और जमीन की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी पैदा कर सकती है।

2030 का लक्ष्य और संभावना

इंडस्ट्री का लक्ष्य 2030 तक अपनी क्षमता को 6.7 GW तक ले जाना है। इस बड़े बदलाव के लिए करीब $300 बिलियन से ज्यादा के निवेश की योजना पाइपलाइन में है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कंपनियां पावर और कूलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ इस बड़े विस्तार को भौगोलिक रूप से अन्य क्षेत्रों तक फैला पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.