दुनियाभर में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स पावर की कमी, कूलिंग सिस्टम की जरूरतें और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते अटक रहे हैं। Bernstein के एनालिस्ट्स का कहना है कि लगभग 40% प्लान की गई क्षमता रद्द या टल सकती है। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जिनके पास पहले से बिजली और जमीन के अप्रूवल हैं।
पावर की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें
ग्लोबल डेटा सेंटर सेक्टर में इन दिनों एक बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। तेजी से विस्तार की योजनाओं के सामने अब फिजिकल और लॉजिस्टिकल दिक्कतें आ खड़ी हुई हैं। Bernstein की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस इंडस्ट्री में प्रोजेक्ट्स के टलने या रद्द होने का दौर 2027 तक जारी रह सकता है। असली दिक्कत अब पैसों की नहीं, बल्कि हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग, खासकर AI के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की है।
सबसे बड़ी रुकावट बिजली की उपलब्धता है। दुनिया के कई बड़े मार्केट्स में, बिजली ग्रिड से जुड़ने के लिए इंतज़ार (utility interconnection queues) 3 से 4 साल तक बढ़ गया है। चूंकि डेटा सेंटर को भारी और भरोसेमंद बिजली सप्लाई की जरूरत होती है, इसलिए ग्रिड कनेक्शन न मिल पाने की वजह से कई ऑपरेटर्स अपनी प्लान की गई साइट्स पर पुनर्विचार कर रहे हैं या उन्हें छोड़ रहे हैं। इसके अलावा, नए और ज्यादा पावरफुल AI सर्वर भारी गर्मी पैदा करते हैं, जिसे सामान्य फैसिलिटी ठीक से मैनेज नहीं कर पाती, इसलिए एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम की जरूरत भी एक बड़ी चुनौती है।
कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में भारी उछाल
बिजली और कूलिंग के अलावा, इन फैसिलिटीज के कंस्ट्रक्शन की लागत भी काफी बढ़ गई है। Bernstein का अनुमान है कि 2023 के बाद से प्रति मेगावाट कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 20% से 25% तक बढ़ी है। यह उछाल मुख्य रूप से हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर और स्विचगियर जैसे जरूरी इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स की बढ़ी कीमतों, साथ ही स्टील और स्पेशल कंस्ट्रक्शन लेबर की बढ़ती लागत के कारण है।
सप्लाई चेन की दिक्कतें भी एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। बड़े इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट के लिए लीड टाइम (lead time) वर्तमान में 80 से 100 हफ्तों तक पहुंच गया है। इन लंबे इंतज़ारों का मतलब है कि अगर कोई डेवलपर लोकल पावर की समस्या हल भी कर लेता है, तो भी स्पेशल इक्विपमेंट डिलीवर और इंस्टॉल होने तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
हालांकि डेटा प्रोसेसिंग की लॉन्ग-टर्म डिमांड बहुत ज्यादा है, लेकिन मौजूदा माहौल सेक्टर में एक तरह का बंटवारा पैदा कर रहा है। निवेशकों को शायद उन कंपनियों में फर्क करना होगा जिन्होंने पहले से बिजली और जमीन जैसे जरूरी रिसोर्सेज सुरक्षित कर लिए हैं, और उन कंपनियों में जो अभी शुरुआती प्लानिंग स्टेज में हैं या यूटिलिटी अप्रूवल का इंतजार कर रही हैं।
इन जोखिमों से सबसे ज्यादा प्रभावित वे कंपनियां होंगी जो अपने प्रोजेक्ट टाइमलाइन की गारंटी नहीं दे सकतीं। अगर प्रोजेक्ट रद्द होते हैं तो इससे एसेट राइट-डाउन (asset write-downs) या प्रॉफिटेबिलिटी में कमी आ सकती है। दूसरी ओर, लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी (liquid cooling technology) और एडवांस्ड पावर डिस्ट्रीब्यूशन इक्विपमेंट (advanced power distribution equipment) देने वाली कंपनियां बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि वे अगली पीढ़ी के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी। मार्केट संभवतः प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (project execution) और ऑपरेटर्स की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करेगा कि वे इन सिस्टमैटिक बाधाओं के बावजूद नई क्षमता को सफलतापूर्वक ऑनलाइन ला पाते हैं या नहीं। इंडस्ट्री का अगला फेज इस बात पर निर्भर करेगा कि 2027 के बाद की डिमांड को पूरा करने के लिए नई पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से बन पाती है।
