DLF के शेयरों में आज **2.10%** की बढ़त देखने को मिली और यह **₹661.70** पर कारोबार कर रहे हैं। यह तेजी कंपनी द्वारा मार्च 2026 तिमाही के लिए **₹741.18 करोड़** का नेट प्रॉफिट (Net Profit) घोषित करने के बाद आई है। रियल एस्टेट डेवलपर ने निवेशकों के लिए **₹8** प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) भी ऐलान किया है।
तिमाही नतीजों का असर
DLF लिमिटेड के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलने के साथ ही 2.10% उछलकर ₹661.70 के स्तर पर पहुंच गए। यह तेजी कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों और डिविडेंड (Dividend) के ऐलान के बाद आई है।
तिमाही नतीजों का लेखा-जोखा
मार्च 2026 तिमाही के लिए DLF ने ₹1,814.06 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Revenue) दर्ज किया है। हालांकि, यह पिछली तिमाही के ₹2,020.22 करोड़ की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में मामूली बढ़ोतरी हुई है। नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹741.18 करोड़ हो गया, जो दिसंबर 2025 की तिमाही में ₹730.02 करोड़ था। इसी के साथ, शेयर पर कमाई (Earnings Per Share - EPS) भी बढ़कर ₹5.12 हो गई, जो पिछले पीरियड में ₹4.86 थी।
पूरे साल का प्रदर्शन
मार्च 2026 में समाप्त हुए पूरे फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में कंपनी के नतीजे मिले-जुले रहे। सालाना रेवेन्यू में 2.51% की ग्रोथ देखी गई और यह ₹8,194.02 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹7,993.66 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, सालाना नेट प्रॉफिट में 2.70% की मामूली गिरावट आई और यह ₹2,621.85 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹2,694.51 करोड़ था। सालाना ईपीएस (EPS) ₹17.83 रहा, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 के ₹17.64 से थोड़ा बेहतर है।
कर्ज की स्थिति और शेयरधारकों को रिटर्न
कंपनी ने अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने में भी प्रगति की है। मार्च 2026 तक, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 0.00 दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 में 0.09 था। यह इक्विटी की तुलना में बहुत कम उधार का संकेत देता है। इन वित्तीय अपडेट्स के साथ, DLF ने ₹8.00 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) ऐलान किया है, जो 27 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। यह डिविडेंड शेयरधारकों को वैल्यू लौटाने की कंपनी की रणनीति को दर्शाता है। कंपनी ने इस अवधि के लिए 9.70% का रिटर्न ऑन नेट वर्थ (Return on Net Worth) भी दर्ज किया है।
निवेशक कंपनी के भविष्य में प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने और तिमाही रेवेन्यू के उतार-चढ़ाव के बीच प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की क्षमता पर नजर रखेंगे। रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी की लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता का मूल्यांकन करने वाले हितधारकों के लिए कर्ज को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखना एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना रहेगा।
