DLF Primus Project: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, गुरुग्राम प्रोजेक्ट में CBI जांच के आदेश

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AuthorNeha Patil|Published at:
DLF Primus Project: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, गुरुग्राम प्रोजेक्ट में CBI जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में DLF के 'The Primus' प्रोजेक्ट में हुई धांधली पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साइट प्लान से छेड़छाड़ और वादे के मुताबिक **24-मीटर** चौड़ी सड़क न बनाने के मामले में CBI जांच के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई **12 अक्टूबर, 2026** को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच गुरुग्राम स्थित DLF के 'The Primus' प्रोजेक्ट पर बारीकी से नजर रख रही है। कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने घर खरीदारों को जो सपने दिखाए थे और जो असलियत है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर है।

विवाद की मुख्य जड़: क्या है मामला?

विवाद का केंद्र कंपनी का वह वादा है, जिसमें उन्होंने 24-मीटर चौड़ी सड़क बनाने की बात कही थी। लेकिन 3 अगस्त, 2026 को CBI द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि उस जगह पर सड़क की जगह पार्किंग और ग्रीन स्पेस बना दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मार्केटिंग ब्रोशर महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक कानूनी वादा है, जिसका पालन करना डेवलपर की जिम्मेदारी है।

निवेशकों के लिए सबक

यह मामला सिर्फ एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी कंपनियां अक्सर अपने ब्रांड के नाम पर प्रीमियम वसूलती हैं, लेकिन अब कोर्ट की इस सख्ती ने साफ कर दिया है कि प्लान में किसी भी तरह का बदलाव खरीदारों का भरोसा तोड़ सकता है। भविष्य में इस तरह की कार्यवाही किसी भी डेवलपर की वैल्यूएशन पर भारी पड़ सकती है।

अब आगे क्या?

कोर्ट ने डेवलपर को अगली सुनवाई से पहले प्रोजेक्ट को मूल प्लान के मुताबिक दुरुस्त करने की चेतावनी दी है। इसके अलावा, हरियाणा सरकार से भी जमीन अधिग्रहण के मामले में जवाब मांगा गया है। निवेशकों की नजर अब 12 अक्टूबर, 2026 की तारीख पर है, जहां यह तय होगा कि क्या कंपनी कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.