रियल एस्टेट दिग्गज DLF ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए शेयरधारकों को ₹8 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का ऐलान किया है। यह पिछले सालों के मुकाबले एक बड़ी बढ़ोतरी है, लेकिन निवेशकों की नजर कंपनी के नेट प्रॉफिट में आई मामूली गिरावट पर भी है।
Detailed Coverage
रियल एस्टेट की बड़ी कंपनी DLF Limited ने 31 मार्च 2026 को खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए प्रति इक्विटी शेयर ₹8.00 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है। ₹2 फेस वैल्यू वाले इस शेयर पर यह 400% का डिविडेंड है। ₹645.20 के शेयर भाव पर, यह डिविडेंड यील्ड लगभग 1.24% बैठता है।
लगातार बढ़ रहा डिविडेंड
कंपनी पिछले चार सालों से लगातार अपने डिविडेंड भुगतान को बढ़ा रही है। FY22 में यह ₹3.00 प्रति शेयर था, जो अब बढ़कर ₹8.00 हो गया है। डिविडेंड में यह बढ़ोतरी पिछले चार सालों में 160% से ज्यादा रही है। निवेशक इसे मैनेजमेंट की ओर से शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्राथमिकता के तौर पर देखते हैं, भले ही कंपनी नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल की जरूरतों को भी संतुलित कर रही हो।
फाइनेंशियल नतीजे और परफॉर्मेंस
हालांकि डिविडेंड शेयरधारकों को रिटर्न देने पर जोर दिखाता है, FY26 के कंपनी के नतीजे मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। DLF ने ₹8,194.02 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹7,993.66 करोड़ की तुलना में 2.51% की मामूली बढ़ोतरी है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 2.69% की हल्की गिरावट आई है, जो पिछले साल के ₹2,694.51 करोड़ से घटकर ₹2,621.85 करोड़ रह गया है।
कुल प्रॉफिट में गिरावट के बावजूद, कंपनी के Earnings Per Share (EPS) में मामूली सुधार हुआ है, जो पिछले साल के ₹17.64 से बढ़कर ₹17.83 हो गया है। वैल्यूएशन पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, Price-to-Earnings (P/E) रेशियो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 38.58x से घटकर 28.27x हो गया है। हालांकि, Return on Equity (ROE) FY25 के 10.26% से घटकर 9.70% पर आ गया है। Book Value Per Share में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो ₹183.71 पर पहुंच गया है।
मार्केट और ऑपरेशनल आउटलुक
DLF की मार्केट कैपरीब ₹1.59 लाख करोड़ है। रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों और प्रीमियम हाउसिंग की डिमांड के प्रति काफी संवेदनशील होता है। डिविडेंड में बढ़ोतरी शेयरधारकों के लिए एक ठोस रिटर्न है, लेकिन निवेशक कंपनी की ऑपरेटिंग मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता पर भी ध्यान देंगे, खासकर कच्चे माल और निर्माण लागत में उतार-चढ़ाव के बीच। निवेशकों के लिए आगे की राह मैनेजमेंट की ओर से नए प्रोजेक्ट लॉन्च, निर्माण की गति और आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिटेबिलिटी रेशियो को बेहतर बनाने की रणनीति पर कंपनी की टिप्पणी पर निर्भर करेगी।
