साल 2026 में कमर्शियल रियल एस्टेट का नक्शा बदल गया है। सितंबर तक कुल ऑफिस लीजिंग डिमांड में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस (Coworking) की हिस्सेदारी **26%** रही है, जिसने लंबे समय से मार्केट लीडर रहे IT सेक्टर को दूसरे नंबर पर धकेल दिया है।
भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में 2026 एक बड़े बदलाव का साल साबित हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि नौ महीनों में कुल ऑफिस लीजिंग डिमांड में कावर्किंग ऑपरेटर्स ने 26% कब्जा जमा लिया है, जबकि IT और ITeS सेक्टर 25% पर सिमट गया है। हाइब्रिड वर्क मॉडल की बढ़ती लोकप्रियता और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार ने इस ट्रेंड को मजबूती दी है। वहीं, BFSI सेक्टर भी पीछे नहीं है, जिसने कुल डिमांड का 21% हिस्सा हासिल किया है।\n\n### रेंट और वैकेंसी पर असर\nलगातार मांग बनी रहने के कारण नेशनल एवरेज ऑफिस रेंट में साल-दर-साल 8% की बढ़ोतरी हुई है, जो अब ₹97 प्रति वर्ग फीट प्रति माह पर पहुंच गया है। देश भर में वैकेंसी रेट्स घटकर 15.15% रह गए हैं। मुंबई में रेंट सबसे ज्यादा हैं, जबकि हैदराबाद में रेंटल ग्रोथ सबसे आक्रामक रही है। सप्लाई की बात करें तो, कुल 41.1 मिलियन वर्ग फीट ऑफिस स्पेस तैयार हुआ है, लेकिन इसमें असमानता है। बेंगलुरु में नई सप्लाई में 19% का इजाफा हुआ, जबकि NCR और पुणे में प्रोजेक्ट डिलीवरी में क्रमशः 25% और 36% की गिरावट देखी गई है।\n\n### निवेशकों के लिए चुनौतियां\nयह बदलाव निवेशकों के लिए अवसर तो लाया है, लेकिन कुछ जोखिम भी साथ लेकर आया है। कई ऑपरेटर्स 'लीज आर्बिट्रेज' मॉडल पर काम कर रहे हैं, जो लॉन्ग-टर्म लीज और शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू साइकिल के बीच संतुलन बनाए रखने का दबाव पैदा करता है। यदि मार्केट में सप्लाई मांग से ज्यादा बढ़ गई, तो ऑपरेटर्स के मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और कॉर्पोरेट रियल एस्टेट स्ट्रेटजी में बदलाव आने वाले समय में ऑक्यूपेंसी लेवल्स के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं।
