Airport NOC Rules: रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए बड़ी राहत, सरकार ने आसान किए निर्माण नियम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Airport NOC Rules: रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए बड़ी राहत, सरकार ने आसान किए निर्माण नियम

नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) ने हवाई अड्डों के पास निर्माण के लिए NOC प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब स्थानीय निकायों को मंजूरी देने का अधिकार मिलेगा, जिससे प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी कम होगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाई अड्डों के आसपास निर्माण परियोजनाओं के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) हासिल करने की जटिल प्रक्रिया में बड़े सुधार शुरू किए हैं। वर्तमान में, बिल्डर्स को यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी इमारतें उड़ानों में बाधा न डालें, Airports Authority of India (AAI) के कड़े नियमों से गुजरना पड़ता है। अब मंत्री K. Rammohan Naidu ने अधिकारियों को 15 दिन के भीतर एक नया ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मंजूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके।

स्थानीय निकायों को मिलेगी जिम्मेदारी

इस नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा NOC जारी करने का अधिकार शहरी स्थानीय निकायों को सौंपना है। अभी डेवलपर्स को एविएशन रेगुलेटर्स के साथ सीधे तालमेल बिठाने में लंबी देरी और प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस जिम्मेदारी के हस्तांतरण से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों में अटकी हुई आवासीय और कमर्शियल परियोजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

हाइट लिमिट में आएगी पारदर्शिता

डेवलपर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रोजेक्ट के अंत में हाइट लिमिट का पता चलना रही है, जिससे उन्हें महंगा रीडिजाइन करना पड़ता है। अब मंत्रालय निर्माण की शुरुआत में ही बिल्डिंग की अधिकतम ऊंचाई के बारे में स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य बनाने की योजना बना रहा है। इससे प्रोजेक्ट्स में वित्तीय जोखिम कम होगा और प्लानिंग अधिक सटीक होगी।

सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

मंत्रालय ने साफ किया है कि रियल एस्टेट को सपोर्ट देने के बावजूद एविएशन सेफ्टी सबसे ऊपर है। वर्तमान नियम 20 किलोमीटर से 56 किलोमीटर के दायरे में निर्माण को रेगुलेट करते हैं। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि क्या स्थानीय निकाय रडार इंटरफेरेंस और फ्लाइट पाथ जैसी जटिल तकनीकी गणनाओं को सफलतापूर्वक संभाल पाएंगे। यदि इसमें तकनीकी विशेषज्ञता की कमी रहती है, तो भविष्य में नियामक चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.