रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए खुशखबरी! केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट कंप्लीशन की समय-सीमा को **4 महीने** तक बढ़ाने की सलाह दी है। यह फैसला पश्चिम एशिया में सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण निर्माण सामग्री की कमी और बढ़ती लागत से जूझ रहे बिल्डरों को राहत देगा। हालांकि, खरीदारों को पजेशन मिलने में देरी हो सकती है।
डेवलपर्स को मिली राहत
केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज (RERAs) को एक अहम सलाह जारी की है। इसके तहत, प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन और कंप्लीशन की डेडलाइन को 4 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। यह कदम पश्चिम एशिया में चल रहे सप्लाई चेन के संकट के कारण बिल्डरों को बड़ी राहत देगा, जो निर्माण सामग्री की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से परेशान हैं।
किसे मिलेगा फायदा?
यह एडवाइजरी खासतौर पर उन प्रोजेक्ट्स के लिए है जिनकी कंप्लीशन डेट 28 फरवरी 2026 या उसके बाद है। मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि डेवलपर्स को हर प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग आवेदन करने के बजाय, सभी योग्य प्रोजेक्ट्स के लिए एक साथ सामान्य आदेश जारी किए जाएं। इससे डेवलपर्स का एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ कम होगा, जो पहले से ही बढ़ती निर्माण लागत के वित्तीय दबाव से गुजर रहे हैं।
खरीदारों पर क्या होगा असर?
डेवलपर्स को यह राहत मिलने से घर खरीदारों के लिए पजेशन (Possession) मिलने में 4 महीने तक की देरी हो सकती है। इसका सीधा असर प्रोजेक्ट हैंडओवर की टाइमलाइन पर पड़ेगा। सरकार ने RERA एक्ट के तहत यह फैसला लिया है, जो डेवलपर्स के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन को सुरक्षित रखने की अनुमति देता है।
क्या सभी राज्यों में लागू होगा?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केंद्र की यह सलाह सभी राज्यों में अपने आप लागू नहीं होगी। हर राज्य का RERA यह तय करेगा कि इन गाइडलाइंस को लागू करना है या नहीं, और वे इसके लिए अतिरिक्त शर्तें भी लगा सकते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और दिल्ली-NCR जैसे प्रमुख रियल एस्टेट हब से आने वाली आधिकारिक सूचनाओं पर इंडस्ट्री की नजरें टिकी रहेंगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इस एडवाइजरी को कैसे अपनाती हैं और क्या यह देरी खरीदारों के लिए अनिश्चितता को बढ़ाएगी या कम करेगी।
