CREDAI Tamil Nadu ने राज्य सरकार से 'Deemed Approval' सिस्टम और डिजिटल प्रोसेस लागू करने की अपील की है। डेवलपर्स का मानना है कि इससे सरकारी अड़चनें खत्म होंगी और तेलंगाना-कर्नाटक जैसे राज्यों के मुकाबले तमिलनाडु की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
प्रोजेक्ट्स में देरी और बढ़ता खर्चा
डेवलपर्स का कहना है कि वर्तमान में ब्यूरोक्रेटिक देरी के कारण प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन बढ़ जाती है, जिससे ब्याज का बोझ और वर्किंग कैपिटल का दबाव बढ़ रहा है। CREDAI ने सरकार से मांग की है कि अगर किसी प्रोजेक्ट की प्लानिंग सर्टिफाइड प्रोफेशनल्स द्वारा नियमों के तहत सबमिट की जाती है, तो उसे ऑटोमेटिक 'Deemed Approval' (मानद मंजूरी) मिल जानी चाहिए। साथ ही, फाइलों के मैनुअल काम को खत्म करने के लिए पूरी तरह से डिजिटल सबमिशन प्रोसेस की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई है।
दूसरे राज्यों से मिल रही चुनौती
तमिलनाडु इस समय तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों से कड़ी टक्कर ले रहा है, जिन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए बिजनेस प्रोसेस को काफी आसान बनाया है। तेज मंजूरी मिलने से डेवलपर्स प्रोजेक्ट्स को जल्दी लॉन्च कर सकेंगे, जिससे सेल्स वेलोसिटी और कैश फ्लो में सुधार होगा।
छोटे शहरों पर नजर और आगामी इवेंट्स
यह सुधार केवल चेन्नई तक सीमित नहीं, बल्कि नीलगिरी, कोडाइकनाल, वेल्लोर, तंजावुर और करूर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए भी जरूरी है। फिलहाल, चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) द्वारा हाई-राइज बिल्डिंग अप्रूवल की शक्तियां मिलने के बाद थोड़ी राहत मिली है, लेकिन बड़े बदलाव अभी बाकी हैं।
इस बीच, निर्माण लागत में बढ़ोतरी और कच्चे माल की महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए 11-12 अक्टूबर, 2026 को चेन्नई में STATECON 2026 और FAIRBUILD 2026 का आयोजन किया जाएगा। इन इवेंट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फाइनेंसिंग चुनौतियों पर भी विस्तार से बात होगी। निवेशक इन नीतिगत फैसलों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं क्योंकि सरकारी मंजूरी में तेजी सीधे तौर पर डेवलपर्स के मुनाफे और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्रभावित करेगी।
