Real Estate Sector: अफोर्डेबल हाउसिंग पर कैप हटाने की मांग, क्या घर खरीदारों को मिलेगी राहत?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Real Estate Sector: अफोर्डेबल हाउसिंग पर कैप हटाने की मांग, क्या घर खरीदारों को मिलेगी राहत?

क्रेडाई (CREDAI) ने सरकार से अफोर्डेबल हाउसिंग की **₹45 लाख** की कीमत सीमा को हटाने का औपचारिक आग्रह किया है। डेवलपर्स का कहना है कि 2017 के बाद से बढ़ती महंगाई और निर्माण लागत ने इस पुराने नियम को बेअसर बना दिया है, जिससे मार्केट में सप्लाई कम हो गई है।

क्रेडाई (CREDAI) ने अफोर्डेबल हाउसिंग को फिर से परिभाषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डेवलपर्स का तर्क है कि 2017 से तय की गई ₹45 लाख की सीमा अब मौजूदा बाजार स्थितियों के हिसाब से पुरानी हो चुकी है। अब वे चाहते हैं कि कीमत के बजाय घर के साइज (मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर और नॉन-मेट्रो में 90 वर्ग मीटर) के आधार पर इसे तय किया जाए।

क्यों दबाव में है प्राइस कैप?

सीमेंट, स्टील और लेबर की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण डेवलपर्स के लिए अब ₹45 लाख के बजट में प्रोजेक्ट्स बनाना मुश्किल हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक, नई लॉन्चिंग में अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी घटकर 12% से 14% के बीच रह गई है। मुनाफे पर बढ़ते दबाव के चलते डेवलपर्स अब लक्जरी और मिड-सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर मार्जिन मिलता है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

यह बदलाव रियल एस्टेट कंपनियों के लिए दोधारी तलवार जैसा है। अगर सरकार यह सीमा हटाती है, तो सप्लाई बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही घर खरीदना आम लोगों के लिए महंगा भी हो सकता है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'पॉलिसी डिपेंडेंसी' है। जिन लिस्टेड कंपनियों के पोर्टफोलियो में अफोर्डेबल हाउसिंग का हिस्सा ज्यादा है, उन पर मार्जिन का दबाव जारी रह सकता है।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को अब सरकार के रुख पर नजर रखनी होगी। भविष्य में टैक्स स्ट्रक्चर या हाउसिंग इंसेंटिव्स पर आने वाली कोई भी घोषणा यह स्पष्ट करेगी कि सरकार इस पॉलिसी में लचीलापन लाने को तैयार है या नहीं। साथ ही, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां अपने प्रोजेक्ट मिक्स में कैसे बदलाव करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.