Union Budget 2026 ने प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के नियमों में एक महत्वपूर्ण सरलीकरण किया है, खासकर जब विक्रेता गैर-निवासी (NRI) हो। अब भारत में मौजूद खरीदारों को Tax Deducted at Source (TDS) का भुगतान करने के लिए Tax Deduction and Collection Account Number (TAN) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए नियम के तहत, खरीदार अपने मौजूदा Permanent Account Number (PAN) का ही इस्तेमाल इस काम के लिए कर सकेंगे। यह कदम उन खरीदारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अक्सर NRI से प्रॉपर्टी खरीदते समय इस प्रक्रिया में फंस जाते थे।
पहले, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 397(1)(a) के तहत, गैर-निवासी विक्रेता से कोई भी अचल संपत्ति खरीदने वाले निवासी व्यक्ति या HUF को TAN लेना अनिवार्य था। यह नियम, प्रॉपर्टी के एक बार के सौदों के लिए भी, एक अतिरिक्त बोझ था। विशेषज्ञों द्वारा सराहे गए इस बदलाव से, जो सेक्शन 397(1)(c) में संशोधन के ज़रिये लाया गया है, अब ऐसे प्रॉपर्टी सौदों के लिए TAN की अलग से आवश्यकता नहीं होगी। PAN-आधारित चालान (challan) की सुविधा से सरकार को उम्मीद है कि कागजी कार्रवाई कम होगी, प्रॉपर्टी की डील जल्दी पूरी होंगी, और गैर-निवासी विक्रेताओं को भी सुविधा मिलेगी, जिससे वे भारतीय प्रॉपर्टी मार्केट में और सक्रिय रूप से भाग ले सकेंगे।
यह वित्तीय उपाय ऐसे समय में आया है जब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर लगातार विकास की ओर अग्रसर है। अनुमान है कि अगले पांच सालों में यह सेक्टर 5% से 7% की वार्षिक दर से बढ़ेगा। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं, हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने किफायती आवास (affordable housing) पर खास ध्यान न दिए जाने की बात कही है। फिर भी, NRI प्रॉपर्टी सौदों के नियमों को सरल बनाना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा और व्यापार करने में आसानी पैदा करेगा। प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में NRI निवेश से मजबूत मांग देखी जा रही है, साथ ही कमर्शियल रियल एस्टेट में भी अच्छी खासी गतिविधि है। PAN-आधारित TDS की ओर यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि टैक्स अनुपालन स्थापित प्रणालियों के माध्यम से हो, जिससे रियल एस्टेट में क्रॉस-बॉर्डर पूंजी प्रवाह सुचारू होगा और NRI प्रॉपर्टी की बिक्री एवं निवेश की दक्षता बढ़ेगी।