बजट 2026: रियलटी सेक्टर में बंटी राय, इंफ्रा पर फोकस, हाउसिंग की अनदेखी?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
बजट 2026: रियलटी सेक्टर में बंटी राय, इंफ्रा पर फोकस, हाउसिंग की अनदेखी?
Overview

Union Budget 2026 ने रियलटी सेक्टर को दो हिस्सों में बांट दिया है। जहां **₹12.2 लाख करोड़** के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) बूस्ट का स्वागत हो रहा है, वहीं अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) सेगमेंट की अनदेखी पर डेवलपर्स चिंतित हैं। लागतें बढ़ने के बीच, इस अहम सेगमेंट के **18%** से घटकर **12%** रह जाने की आशंका जताई जा रही है।

Union Budget 2026 के प्रस्तावों पर भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए बड़े पैमाने पर फंड आवंटित किया है, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट की लगातार अनदेखी पर उद्योग जगत ने तीखी आलोचना की है।

अफोर्डेबल हाउसिंग पर चिंता?

उद्योग जगत के दिग्गजों ने अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए लक्षित उपायों की कमी को एक गंभीर चिंता बताया है। डेवलपर्स का कहना है कि कीमत और क्षेत्र की पुरानी सीमाओं को संशोधित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया गया है। इस निष्क्रियता और जमीन व निर्माण सामग्री की बढ़ती लागतों के कारण अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट पर भारी दबाव है। अनुमान है कि कुल हाउसिंग सप्लाई का लगभग 18% हिस्सा रखने वाला यह महत्वपूर्ण सेगमेंट घटकर 12% तक रह सकता है। डेवलपर्स ने GST (जीएसटी) के युक्तिकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) या होम लोन पर इनकम टैक्स (Income Tax) लाभों पर किसी भी राहत की अनुपस्थिति पर भी चिंता जताई, साथ ही रियल एस्टेट को इंडस्ट्री का दर्जा देने की मांग भी अनसुनी रह गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, रियलटी को बूस्ट?

एक तरफ जहां अफोर्डेबल हाउसिंग को झटका लगा है, वहीं बजट का इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित ग्रोथ पर जोर सराहनीय है। ₹12.2 लाख करोड़ के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Public Capital Expenditure) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को अच्छी खबर माना जा रहा है। राजमार्गों (Highways), मेट्रो रेल (Metro Rail) और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (Logistics Corridors) में नियोजित निवेश से कनेक्टिविटी बढ़ेगी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में विकास के नए अवसर खुलेंगे। पूर्वी भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकास क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। CPSE (सीपीएसई) एसेट मोनेटाइजेशन के लिए रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) जैसे साधन पूंजी की तैनाती को सुरक्षित बनाने और संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद है। तेजी से मंजूरी, सरल प्रक्रियाएं और डिजिटलीकरण भी प्रोजेक्ट की समय-सीमा और लागत को कम करने में मदद करेंगे, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ और डेवलपर्स व घर खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। इन इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित घोषणाओं से उत्साहित होकर Nifty Realty Index (निफ्टी रियलटी इंडेक्स) में भी मध्यम तेजी देखी गई, हालांकि व्यापक बाजार की स्थितियां कुछ चुनौतियां पेश कर सकती हैं।

बजट का दोहरा पहलू

अफॉर्डेबल हाउसिंग नीति के प्रति उपेक्षा और महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहनों व औपचारिक उद्योग मान्यता की निरंतर अनुपस्थिति एक बड़ी चुनौती पेश करती है। हालांकि बजट बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और REITs (आरईआईटी) व InVITs (इनविट) जैसे आधुनिक निवेश साधनों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है, लेकिन यह हाउसिंग के एक महत्वपूर्ण हिस्से की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में पीछे रह जाता है। यह दोहरी नीति एक स्पष्ट अंतर छोड़ती है, जिसका मतलब है कि बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तो गति पकड़ सकता है, लेकिन बढ़ती आर्थिक दबावों के बीच एक बड़ी आबादी की आवास संबंधी जरूरतें अधूरी रह सकती हैं।

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