यूनियन बजट 2026 का रियल एस्टेट सेक्टर पर मिला-जुला असर देखने को मिला है। जहां सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर लगातार जोर देने की तारीफ हुई है, वहीं सस्ते घरों (Affordable Housing) वाला ज़रूरी सेक्टर मायूस है।
सस्ते घरों पर मायूसी
CREDAI के नेशनल प्रेसिडेंट शेखर पटेल ने साफ कहा कि बजट में 'सस्ते घरों के लिए कुछ भी ठोस नहीं है'. इंडस्ट्री बॉडी ने चेतावनी दी है कि अगर पॉलिसी में बदलाव नहीं हुआ तो नए लॉन्च होने वाले घरों में अफोर्डेबल हाउसिंग का हिस्सा जो अभी 18% है, वह गिरकर 12% तक आ सकता है।
इसकी मुख्य वजह कंस्ट्रक्शन और जमीन की बढ़ती कीमतें हैं, साथ ही सस्ते घर की परिभाषा भी पुरानी हो चुकी है, जो मौजूदा मार्केट को नहीं दर्शाती। ANAROCK ग्रुप के अनुज पुरी जैसे एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सेक्टर पेंडेमिक के बाद से ही 'लगातार गिर रहा है' और इसे सीधे सरकारी मदद की ज़रूरत है। सस्ते घरों के लिए परिभाषा को अपडेट न करना या कोई टैक्सेशन छूट न देना, एक बड़ी चूक मानी जा रही है, जबकि यह 'इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर' का अहम हिस्सा है।
सप्लाई कमजोर होने के मायने
शेखर पटेल ने जोर देकर कहा कि सस्ता घर बनाना सिर्फ एक वेलफेयर स्कीम नहीं, बल्कि रोजगार, खपत और सामाजिक स्थिरता का एक बड़ा जरिया है। इस सेगमेंट में सप्लाई कमजोर पड़ने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं, जैसे किराए का बढ़ना, कर्मचारियों के लिए लंबी दूरी तय करना और अनौपचारिक बस्तियों का बढ़ना। CREDAI ने शहरी विकास को समावेशी और टिकाऊ बनाने के लिए पॉलिसी पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि सस्ते घर की जो कीमत और एरिया की लिमिट 2017 से तय है, वह आज की मार्केट कंडीशन से मेल नहीं खाती।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा बूस्ट
एक तरफ जहां सस्ते घरों को लेकर चिंता जताई गई, वहीं CREDAI ने इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के निवेश की जमकर तारीफ की। बजट में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को FY2026-27 के लिए बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है, जिससे प्रॉपर्टी सेक्टर को काफी फायदा होने की उम्मीद है। हाईवे, मेट्रो, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, नए ग्रोथ कॉरिडोर खोलेगा और लंबे समय के शहरी विकास को सपोर्ट करेगा, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में। यहां तक कि प्राइवेट डेवलपर्स को सपोर्ट करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड का गठन भी इंफ्रा ग्रोथ की तरफ एक मजबूत कदम है।
बिजनेस आसान बनाने पर जोर
इसके अलावा, CREDAI ने बिजनेस को आसान बनाने (Ease of Doing Business) पर जोर देने का भी स्वागत किया है। संस्था का मानना है कि प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में तेजी और प्रक्रियाओं को सरल, डिजिटल बनाने से प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और लागत काफी कम हो सकती है, जिसका सीधा फायदा डेवलपर्स और घर खरीदारों दोनों को होगा।
भविष्य की मांगें
आखिर में, CREDAI ने सरकार से सस्ते घरों के लिए तुरंत पॉलिसी पर ध्यान देने की अपील की है। पहले भी संगठन ने नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन (National Rental Housing Mission) और सस्ते घरों की परिभाषा को संशोधित करने की मांग की थी, जिसमें कारपेट एरिया (carpet area) बढ़ाने और वैल्यू कैप को हटाने जैसे सुझाव शामिल थे, ताकि सेक्टर की स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना किया जा सके। इस सेगमेंट के लिए सीधे टैक्सेशन छूट का अभाव, भारत के मध्य और निम्न-मध्य वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदने की राह में एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।