Brookfield India REIT ने अपने QIP को ₹2,600 करोड़ तक बढ़ाकर साबित कर दिया है कि भारतीय ऑफिस एसेट्स (Office Assets) में निवेशकों का भरोसा कितना मजबूत है। इस फंड जुटाने की प्रक्रिया में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी देखी गई, जिसके कारण फ्लोर प्राइस (Floor Price) ₹329.94 प्रति यूनिट तय किया गया। यह REIT के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर दिसंबर में ₹3,500 करोड़ का फंड जुटाने के बाद। कंपनी ने पहले ही ₹4,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाने की अनुमति ले रखी थी, जिसका इस्तेमाल भविष्य की ग्रोथ, कैपिटल कमिटमेंट्स और डेट (Debt) चुकाने के लिए किया जाएगा।
इस विस्तारवादी रणनीति को ज़मीनी हकीकत में बदलने के लिए, Brookfield India REIT ने PwC India के अनुभवी Shashank Jain को 1 जुलाई से नया CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। यह नई नियुक्ति कंपनी के आगे बढ़ने की दिशा को स्पष्ट करती है।
भारतीय REIT सेक्टर में भी एक नया जोश दिख रहा है। साल 2030 तक इसके ₹19.7 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। SEBI का REITs को इक्विटी-संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स के तौर पर वर्गीकृत करने का फैसला (जनवरी 2026 से) इस सेक्टर में और भी अधिक संस्थागत निवेश (Institutional Investment) ला सकता है। अनुकूल ब्याज दरें (Interest Rates) भी REITs जैसे यील्ड-ओरिएंटेड एसेट्स (Yield-Oriented Assets) के लिए बेहद सकारात्मक हैं। Brookfield India REIT इस बढ़ते माहौल का फायदा उठाने के लिए अपनी ग्रोथ-ओरिएंटेड रणनीति पर काम कर रहा है, जो Embassy REIT के डिविडेंड फोकस और Mindspace REIT के आय-विकास संतुलन से अलग है।
हालांकि, हर निवेश की तरह, इसमें भी कुछ जोखिम शामिल हैं। प्रमोटर होल्डिंग्स (Promoter Holdings) में कमी आई है और इनमें से 90% गिरवी (Pledged) रखी गई हैं। पिछले तीन सालों का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) सिर्फ 1.10% रहा है, और कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) भी चिंताजनक है। कंपनी पर ₹11,500 करोड़ का नेट डेट (Net Debt) है, जबकि डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) 0.65 है। डिविडेंड (Dividend) का रिकॉर्ड भी लगातार स्थिर नहीं रहा है।
इन चिंताओं के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) का Brookfield India REIT पर भरोसा कायम है। वे इसे 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और इसका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹375.46 बता रहे हैं, जो अच्छी-खासी अपसाइड (Upside) का संकेत देता है। नए नेतृत्व के साथ, जुटाए गए फंड का उपयोग अधिग्रहण (Acquisitions) और पोर्टफोलियो विस्तार में किया जाएगा, जिसका मुख्य लक्ष्य कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) होगा।
