रियल एस्टेट कंपनी Brigade Enterprises के लिए ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है और ₹785 का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, कंपनी की पहली तिमाही (Q1 FY27) में रेवेन्यू **12-13%** घटा है, लेकिन नेट प्रॉफिट **37%** बढ़कर **₹217 करोड़** हो गया। प्री-सेल्स में गिरावट के बावजूद, कलेक्शन **7%** बढ़ा है, जो कंपनी के कैश फ्लो को मजबूती दे रहा है।
Brigade Enterprises पर Prabhudas Lilladher का बुलिश रुख
ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने रियल एस्टेट कंपनी Brigade Enterprises पर अपना भरोसा जताया है। फर्म ने 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखा है और शेयर के लिए ₹785 का नया टारगेट प्राइस तय किया है। यह लक्ष्य हालिया पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद आया है, जिसमें कंपनी के प्रदर्शन में मिले-जुले संकेत मिले हैं।
जानिए नतीजों का पूरा हाल
जून 2026 में समाप्त हुई तिमाही में Brigade Enterprises का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 12% से 13% घटकर ₹1,115 करोड़ से ₹1,179 करोड़ के बीच रहा। हालांकि, बॉटम लाइन पर अच्छी खबर है। कंपनी का EBITDA 13% बढ़कर ₹425 करोड़ हो गया, और EBITDA मार्जिन बढ़कर 36% तक पहुंच गया।
सबसे खास बात यह है कि कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 37% की जोरदार उछाल के साथ ₹217 करोड़ रहा। इस मुनाफे में असाधारण आय (exceptional gains) का भी योगदान रहा। नए प्रोजेक्ट्स की बिक्री (pre-sales) में 5% की गिरावट आई और यह ₹1,061 करोड़ रही, लेकिन अच्छी खबर यह है कि कंपनी की कुल कलेक्शन 7% बढ़कर ₹1,856 करोड़ हो गई। यह मौजूदा प्रोजेक्ट्स से मजबूत कैश फ्लो की ओर इशारा करता है।
कंपनी का कर्ज और कॉर्पोरेट एक्शन
Brigade Enterprises की बैलेंस शीट मजबूत दिख रही है। कंपनी पर कुल ₹5,305 करोड़ का ग्रॉस डेट है, जबकि नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.26 है। राहत की बात यह है कि इस कर्ज का 86% लीज रेंटल के बदले में सुरक्षित (securitized) है, जिससे कंपनी को फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
हाल ही में, जून 2026 में कंपनी ने 1:3 के रेशियो से बोनस इश्यू पूरा किया। वहीं, जुलाई 2026 में कंपनी ने प्रमोटर्स के लिए ₹180.05 करोड़ के प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू को वापस लेने का फैसला किया, जो निवेशकों की प्रतिक्रिया के बाद लिया गया था।
भविष्य के जोखिम और चुनौतियां
प्रभुदास लीलाधर (Prabhudas Lilladher) भले ही बुलिश हो, लेकिन कंपनी को कुछ बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। चेन्नई में एक प्रोजेक्ट के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस रद्द होने से ₹126 करोड़ की संपत्ति खतरे में है। इसके अलावा, कंपनी ₹92 करोड़ के प्रॉपर्टी टैक्स डिस्प्यूट से भी जूझ रही है।
रियल एस्टेट सेक्टर के अपने जोखिम भी हैं, जैसे डिमांड में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों का असर। कंपनी के पास 10 से 12 मिलियन स्क्वायर फीट का बड़ा लॉन्च पाइपलाइन है। इस योजना को समय पर पूरा करने में कोई भी देरी कंपनी की कमाई को प्रभावित कर सकती है। आने वाले तिमाही में इन रेगुलेटरी मामलों और प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन पर बारीक नजर रखनी होगी।
