Greater Bengaluru Authority ने शहर के सभी फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए 30 अगस्त, 2026 की समय सीमा तय की है। अब तक 1,500 किमी में से **964 किमी** फुटपाथ खाली कराए जा चुके हैं, और मरम्मत के लिए **₹70 करोड़** का बजट भी मंजूर किया गया है।
बेंगलुरु में फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी
Greater Bengaluru Authority (GBA) ने पूरे शहर में फैले फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए 30 अगस्त, 2026 की सख्त डेडलाइन जारी कर दी है। यह कदम भारत के सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों में से एक, बेंगलुरु में शहरी गतिशीलता (urban mobility) और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े अभियान का हिस्सा है।
अभी तक, अधिकारियों ने प्रमुख सड़कों पर 964 किलोमीटर फुटपाथों को सफलतापूर्वक खाली करा लिया है। शहर का लक्ष्य 1,500 किलोमीटर का है, जिसका मतलब है कि काम का एक बड़ा हिस्सा अभी बाकी है। इस प्रयास को समर्थन देने के लिए, प्रशासन ने खाली कराए गए फुटपाथों की मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए विशेष रूप से ₹70 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
सख्ती और वित्तीय उपाय
इस अभियान की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए, सरकार सिर्फ अतिक्रमण हटाने से आगे बढ़ रही है। ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री, कृष्ण बायरे गौड़ा ने स्थानीय अधिकारियों को सख्त प्रवर्तन लागू करने का निर्देश दिया है। इसमें बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के सामान को तुरंत जब्त करना और दोगुना जुर्माना लगाना शामिल है। इस तरीके का मकसद सड़क विक्रेताओं और अस्थायी ठेलों को फुटपाथों पर दोबारा कब्जा करने से रोकना है।
फुटपाथ अभियान के साथ-साथ, प्रशासन 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' (Freedom from Waste) अभियान भी चला रहा है, जिसमें निर्माण मलबे और लावारिस वाहनों को हटाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ये पहल शहर के वाणिज्यिक और आवासीय परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कुशल शहरी बुनियादी ढांचा प्रॉपर्टी की पहुंच और आउटर रिंग रोड जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में व्यापार करने में आसानी को सीधे प्रभावित करता है।
चुनौतियां और दीर्घकालिक स्थिरता
हालांकि वर्तमान अभियान प्रगति दिखा रहा है, निवेशक और निवासी इन बदलावों की स्थिरता पर नजर रखेंगे। पिछले अतिक्रमण हटाने के प्रयासों में एक आवर्ती चुनौती यह रही है कि प्रवर्तन दल के हटते ही अतिक्रमण जल्द ही वापस आ जाते हैं। लगातार, दीर्घकालिक निगरानी सुनिश्चित करना शहर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन बाधा बना हुआ है।
इसके अलावा, पैदल चलने वालों के रास्तों पर सभी बाधाएं अवैध अतिक्रमण नहीं हैं। एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती स्थायी उपयोगिता बुनियादी ढांचे, जैसे BESCOM बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर की उपस्थिति है, जो अभी भी पैदल चलने वालों की पहुंच को बाधित कर रहे हैं। इन उपयोगिता मुद्दों को संबोधित करने के लिए कई नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी, जो पूरी तरह से कार्यात्मक फुटपाथों के लिए समय-सीमा को प्रभावित कर सकता है। इस अभियान की प्रभावशीलता इस बात से आंकी जाएगी कि शहर अगस्त की समय-सीमा के बाद इन स्थानों को कितनी अच्छी तरह बनाए रखता है और क्या यह शहरी नियोजन आवश्यकताओं के साथ विक्रेताओं की आजीविका को संतुलित कर सकता है।
