बेंगलुरु में निर्माण लागत में **33%** तक का उछाल आया है। तमिलनाडु से आने वाले जरूरी कंस्ट्रक्शन मटेरियल पर **जनवरी 2027** तक रोक लगने से डेवलपर्स के सामने सप्लाई चेन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बेंगलुरु का कंस्ट्रक्शन सेक्टर इस समय एक बड़े सप्लाई चेन संकट से जूझ रहा है। तमिलनाडु सरकार द्वारा जरूरी कंस्ट्रक्शन मटेरियल जैसे एम-सैंड (M-sand), पी-सैंड (P-sand) और कंक्रीट के अंतर-राज्यीय परिवहन पर रोक लगाने से डेवलपर्स के लिए लागत 15% से 33% तक बढ़ गई है। यह प्रतिबंध जनवरी 2027 तक लागू रहेगा, जो बेंगलुरु के रियल एस्टेट बाजार के लिए एक लंबी चुनौती बन गया है।
सप्लाई चेन की चुनौतियां
बेंगलुरु के डेवलपर्स दशकों से कच्चा माल लेने के लिए तमिलनाडु के होसुर-कृष्णगिरि बेल्ट पर निर्भर रहे हैं। अब अचानक सप्लाई रुकने से डेवलपर्स को स्थानीय विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं, जिनमें क्वालिटी चेक और लॉजिस्टिक की समस्याओं के कारण बेंगलुरु मेट्रो सहित कई बड़े प्रोजेक्ट्स में कुछ महीनों की देरी हो चुकी है।
इसके अलावा, पहले जो सप्लायर्स उधार (Credit) पर माल देते थे, वे अब 'कैश एंड कैरी' मॉडल पर शिफ्ट हो गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि डेवलपर्स को तुरंत भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे उनका वर्किंग कैपिटल का गणित बिगड़ गया है। Shriram Properties जैसी कंपनियां इस कठिन दौर में सप्लाई चेन को मैनेज करने की कोशिश कर रही हैं।
मुनाफे पर दबाव और रेगुलेटरी रिस्क
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता मार्जिन को लेकर है। चूंकि कई डेवलपर्स ने अपने प्रोजेक्ट्स की कीमतें पहले ही तय कर दी हैं, वे बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहे हैं। इस कारण उन्हें अपना मुनाफा कम करना पड़ रहा है।
साथ ही, अगर मटेरियल की कमी के चलते प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए, तो डेवलपर्स को RERA के तहत पेनल्टी और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि कंपनियां अपने कैश फ्लो को कैसे संभालती हैं और क्या आने वाले प्रोजेक्ट्स में वे कीमतें बढ़ाकर इस नुकसान की भरपाई करेंगी।
