बेंगलुरु के प्राइम ऑफिस स्पेस के किराए में **11.5%** का उछाल देखा गया है, जो वैश्विक स्तर के शहरों की बराबरी कर रहा है। हालांकि, अच्छी कीमतों के बावजूद भारत के प्रमुख शहरों में कुल लीजिंग वॉल्यूम में **13.6%** की कमी आई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
प्रीमियम ऑफिस स्पेस की बढ़ती डिमांड
वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के डेटा के अनुसार, बेंगलुरु का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार सबसे मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। प्राइम ऑफिस रेंट में 11.5% की बढ़त ने बेंगलुरु को टोक्यो जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल हब की कतार में खड़ा कर दिया है। इसी अवधि में दिल्ली-एनसीआर में रेंट 5.4% और मुंबई में 4.0% बढ़े हैं।
बाजार में नरमी के संकेत
रेंट भले ही ऊपर जा रहे हैं, लेकिन बाजार एक कूलिंग फेस से गुजर रहा है। पूरे भारत में कुल लीजिंग वॉल्यूम 13.6% घटकर 7.6 मिलियन स्क्वायर फीट रह गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि डिमांड अब केवल 'ग्रेड ए' (Grade A) यानी मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहतर सुविधाओं वाली प्रॉपर्टीज तक सीमित हो गई है, जबकि पुरानी इमारतों के लिए खरीदार मिलना मुश्किल हो रहा है।
REITs और डेवलपर्स के लिए रिस्क
इस स्थिति का सीधा असर रियल एस्टेट डेवलपर्स और REITs पर पड़ेगा। अच्छी प्रॉपर्टीज के मालिक तो ज्यादा किराया वसूल पा रहे हैं, लेकिन वैकेंसी रेट अभी भी एक चुनौती है। बेंगलुरु में वैकेंसी 13.4%, मुंबई में 15.2% और दिल्ली-एनसीआर में 14.5% है। यह अधिक सप्लाई का संकेत है जो किराए में भविष्य की तेजी पर लगाम लगा सकता है।
बदलता टेनेंट प्रोफाइल
आईटी सर्विसेज कंपनियों की डिमांड घटने से बाजार का समीकरण बदल गया है। अब इनकी जगह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रोवाइडर्स ले रहे हैं, जिनकी जरूरतें और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें बिल्कुल अलग हैं।
अंत में, दिल्ली-एनसीआर का सालाना किराया ₹6,965 प्रति स्क्वायर फीट के साथ सबसे महंगा है, वहीं मुंबई ₹6,514 पर है। बेंगलुरु का रेंट ₹3,539 प्रति स्क्वायर फीट है, जो तुलनात्मक रूप से अभी भी सस्ता बना हुआ है। अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या GCCs की बढ़ती संख्या आईटी कंपनियों की घटती डिमांड की भरपाई कर पाएगी या नहीं।
