बेंगलुरु और हैदराबाद में साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में **30.45 मिलियन स्क्वायर फीट** नया ऑफिस स्पेस जुड़ा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की मजबूत मांग ने रियल एस्टेट बाजार की तस्वीर बदल दी है, जिसका सीधा असर बड़े डेवलपर्स और REITs पर पड़ रहा है।
भारत के सात प्रमुख शहरों में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल 43.66 मिलियन स्क्वायर फीट नई ऑफिस सप्लाई देखी गई है। इसमें बेंगलुरु और हैदराबाद का दबदबा रहा, जिन्होंने कुल सप्लाई का बड़ा हिस्सा हासिल किया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 38.84 मिलियन स्क्वायर फीट था, जो साफ दिखाता है कि डेवलपर्स को हाई-क्वालिटी ऑफिस स्पेस की भविष्य की मांग पर पूरा भरोसा है।
GCC का बड़ा असर
इस मांग के पीछे सबसे बड़ी ताकत 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCC) हैं। सितंबर तक हुई कुल लीजिंग एक्टिविटी में इन सेंटर्स का हिस्सा 26.2 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जो कुल डिमांड का 42 प्रतिशत से अधिक है। इसमें से 62 प्रतिशत लीज विदेशी कंपनियों द्वारा ली गई हैं, जो साबित करता है कि भारत अब ग्लोबल कंपनियों के लिए इंजीनियरिंग और रिसर्च का हब बन चुका है।
फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की बढ़ती भूख
सिर्फ लंबी अवधि की लीजिंग ही नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इस सेक्टर में ऑपरेटरों ने 13.83 मिलियन स्क्वायर फीट जगह हासिल की है। यह ट्रेंड उन लिस्टेड कंपनियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो बड़े पोर्टफोलियो मैनेज करती हैं, जैसे कि Embassy Office Parks REIT, Mindspace Business Parks REIT, और Brookfield India Real Estate Trust। इसके अलावा, दक्षिण भारत में मजबूत पकड़ रखने वाले डेवलपर्स जैसे Prestige Estates और Brigade Enterprises पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
मार्केट का भविष्य और रिस्क
फिलहाल ऑफिस मार्केट में वैकेंसी लेवल घटकर 14.8 प्रतिशत पर आ गया है, जो एक स्वस्थ संकेत है। हालांकि, जैसे-जैसे नई इमारतें मार्केट में आ रही हैं, निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या GCC की डिमांड इतनी मजबूत बनी रहेगी कि बिना रेंटल रेट्स पर दबाव डाले इस सप्लाई को सोख सके। इकोनॉमिक ग्रोथ और इंटरेस्ट रेट साइकिल के प्रति संवेदनशील होने के नाते, किसी भी ग्लोबल सेंटीमेंट में बदलाव रियल एस्टेट के भविष्य के विस्तार को प्रभावित कर सकता है।
