बेंगलुरु के प्राइम इलाकों में 2BHK फ्लैट्स की कीमतें **₹1.3 करोड़** तक पहुंच गई हैं, जिससे अच्छी कमाई करने वाले प्रोफेशनल भी अब घर खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। मार्केट में नई सप्लाई में **15%** की गिरावट आई है और डेवलपर्स का पूरा ध्यान लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर शिफ्ट हो गया है।
बेंगलुरु के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में कीमतों और लोगों की खरीदारी क्षमता के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। इंदिरा नगर (Indiranagar) और व्हाइटफील्ड (Whitefield) जैसे पॉश इलाकों में एक 2BHK अपार्टमेंट की कीमत अब ₹1.3 करोड़ तक पहुंच चुकी है। अगर किसी प्रोफेशनल की मंथली टेक-होम सैलरी ₹1.8 लाख भी है, तो भी उनके लिए इतनी बड़ी राशि चुकाना और फिर भारी-भरकम EMI का बोझ उठाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
डेवलपर्स की 'प्रीमियम' रणनीति
इस बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण डेवलपर्स की स्ट्रैटेजी में बदलाव है। Prestige Estates, Brigade Enterprises और Sobha जैसे बड़े डेवलपर्स अब अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए केवल प्रीमियम और लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर ही जोर दे रहे हैं। इसे 'प्रीमियमाइजेशन' कहा जा रहा है। इसका नुकसान यह हुआ है कि मिड-सेगमेंट और अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या बाजार में लगातार कम होती जा रही है।
सप्लाई में कमी और मार्केट का जोखिम
आंकड़े बताते हैं कि भारत के बड़े शहरों में नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में 15% की गिरावट देखी गई है। सप्लाई कम होने की वजह से डेवलपर्स कीमतों को ऊंचा बनाए रखने में तो सफल हो रहे हैं, लेकिन अगर घर की कीमतें लोगों की इनकम के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में सेल्स रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।
निवेशकों को यह समझना होगा कि हाई प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और मौजूदा ब्याज दरों के कारण होम लोन का खर्च बहुत बढ़ गया है। अगर खरीदार बाजार से बाहर होते हैं, तो डिमांड रेंटल मार्केट या रीसेल प्रॉपर्टीज की ओर शिफ्ट हो सकती है। आगे चलकर यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डेवलपर्स अपनी इन्वेंट्री को मैनेज करने के लिए फिर से मिड-सेगमेंट पर फोकस करेंगे या नहीं।
