भारत के ऑफिस लीजिंग मार्केट में साल 2026 की पहली छमाही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बैंकिंग और फाइनेंशियल फर्मों ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए **7.32 मिलियन** स्क्वायर फीट जगह ली है, जो पिछले साल के मुकाबले **70%** ज्यादा है।
भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट ने साल 2026 की पहली छमाही में 45.5 मिलियन स्क्वायर फीट की कुल एब्जॉर्प्शन के साथ रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस ग्रोथ में एक बड़ा बदलाव यह है कि पहली बार ग्लोबल बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ऑफिस स्पेस की मांग में सबसे आगे निकल गया है।
खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों के जटिल ऑपरेशन्स को संभालने वाले 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' के लिए इन फर्मों ने टॉप आठ शहरों में 7.32 मिलियन स्क्वायर फीट जगह ली है। यह पिछले साल की समान अवधि के 4.31 मिलियन स्क्वायर फीट के मुकाबले 70% की शानदार उछाल है। अब फाइनेंशियल सेक्टर इन सेंटर्स के लिए कुल डिमांड का 36% हिस्सा अकेले संभाल रहा है।
IT सेक्टर का घटा फुटप्रिंट
वहीं दूसरी ओर, कमर्शियल स्पेस का पुराना लीडर रहा आईटी (IT) और सॉफ्टवेयर सेक्टर अब सुस्ती दिखा रहा है। विदेशी आईटी कंपनियों ने अपने विस्तार को धीमा कर दिया है और उनका ऑफिस स्पेस इनटेक 28% घटकर 4.13 मिलियन स्क्वायर फीट रह गया है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लीजिंग एक्टिविटी भी मामूली घटकर 4.05 मिलियन स्क्वायर फीट रही।
निवेशकों के लिए रिस्क और मॉनिटरेबल्स
बाजार में फिलहाल सर्विस-ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज का काफी सपोर्ट मिल रहा है, जिन्होंने 5.10 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग की है। यह डायवर्सिफिकेशन कमर्शियल डेवलपर्स के लिए एक स्टेबलाइजर का काम कर रहा है।
हालांकि, निवेशकों को ग्लोबल इकोनॉमिक रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। ऑफिस मार्केट पूरी तरह से मल्टीनेशनल कंपनियों के निवेश पर निर्भर है। यदि ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती आती है या बड़ी टेक कंपनियां अपनी स्ट्रैटेजी बदलती हैं, तो ऑक्यूपेंसी लेवल्स पर दबाव पड़ सकता है। आने वाले समय में बड़े शहरों में 'वेकेंसी रेट्स' और नई सप्लाई पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा।
