नतीजों पर एक नज़र
Ashiana Housing Limited ने Q3 FY26 के तिमाही नतीजे जारी किए हैं, जो कि मुनाफे के मामले में काफी कमजोर दिखे हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) साल-दर-साल (YoY) 62.2% की बड़ी गिरावट के साथ ₹2,327 लाख पर सिमट गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 4.2% की मामूली कमी आई और यह ₹76,204 लाख दर्ज किया गया। इन नतीजों का असर कंपनी के प्रति शेयर आय (EPS) पर भी पड़ा, जो कि पिछले साल ₹30.59 से घटकर ₹11.58 रह गया। स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन भी घटकर 31.33% (पिछले साल 33.01%) और नेट प्रॉफिट मार्जिन 16.11% (पिछले साल 20.01%) पर आ गया।
कंसोलिडेटेड लेवल पर भी मुनाफे की तस्वीर कुछ खास बेहतर नहीं रही। रेवेन्यू में 30.5% की मजबूत ग्रोथ के बावजूद, कंसोलिडेटेड PAT 42.2% गिरकर ₹3,576 लाख पर आ गया। कंसोलिडेटेड EPS भी पिछले साल के ₹30.77 से घटकर ₹17.80 रह गया। हालांकि, कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार देखा गया, जो 29.49% (पिछले साल 22.75%) पर पहुँच गया, और नेट प्रॉफिट मार्जिन भी मामूली बढ़कर 15.63% (पिछले साल 15.30%) हुआ।
नौ महीनों के आंकड़े
अगर नौ महीनों (9-month period) के परफॉरमेंस की बात करें, जो 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए, तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 14.3% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹213,120 लाख रहा। लेकिन, PAT में 26.4% की गिरावट आई और यह ₹15,199 लाख पर आ गया। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 16.0% बढ़कर ₹133,250 लाख दर्ज किया गया, जबकि PAT 29.8% गिरकर ₹9,894 लाख रहा। इस अवधि के दौरान, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 7.78% (पिछले साल 11.37%) तक कम हो गया।
खास कॉर्पोरेट एक्शन और फाइनेंशियल स्थिति
नतीजों के साथ ही, कंपनी के बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए ₹1 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। यह डिविडेंड 50% बनता है। डिविडेंड पेमेंट की तारीख 12 मार्च 2026 तक या उससे पहले रखी गई है, जबकि रिकॉर्ड डेट 19 अप्रैल 2026 तय की गई है। यह डिविडेंड की तारीखों का एक असामान्य संयोग है, जहाँ पेमेंट डेट रिकॉर्ड डेट से पहले आ रही है। इसके अलावा, श्री विकास चौधरी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है, जिसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी EGM में ली जाएगी।
31 दिसंबर 2025 तक, कंसोलिडेटेड टोटल एसेट्स में 21.2% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹409,757 लाख हो गए। कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो मामूली बढ़कर 0.36 (पिछले साल 0.34) हुआ, लेकिन इंटरेस्ट सर्विस कवरेज रेशियो में काफी सुधार हुआ और यह 3.02 (पिछले साल 1.00) पर पहुँच गया।
आगे की राह
Ashiana Housing ने भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस या जोखिम (risks) नहीं बताए हैं, सिवाय नए लेबर कोड से जुड़े डेवलपमेंट पर नजर रखने के। तिमाही नतीजों में मुनाफे में आई यह तेज गिरावट, खासकर स्टैंडअलोन बेसिस पर, निवेशकों के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बनी रहेगी। डिविडेंड की तय की गई असामान्य तारीखें भी स्पष्टीकरण की मांग करती हैं।