मुनाफे पर ब्याज का जोरदार झटका!
Arihant Superstructures Limited (ASL) के लिए Q3 FY26 के नतीजे चिंता बढ़ाने वाले रहे। कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) साल-दर-साल (YoY) के आधार पर 67.3% तक गिर गया और यह ₹254 मिलियन से घटकर सिर्फ ₹83 मिलियन रह गया। इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण रहा कंपनी का ब्याज का खर्च, जो 94.7% की जोरदार छलांग लगाकर ₹478 मिलियन पर पहुंच गया। इस वजह से, कंपनी का PAT मार्जिन भी घटकर 6.59% पर आ गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 16.84% था।
अगर रेवेन्यू की बात करें, तो यह पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले 2.7% बढ़ा और ₹1,260 मिलियन तक पहुंचा। लेकिन, साल-दर-साल (YoY) के आधार पर रेवेन्यू में 16.4% की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) भी YoY के आधार पर 31.8% घटकर ₹289 मिलियन रहा। इसके चलते, Q3 FY26 में EBITDA मार्जिन 518 बेसिस पॉइंट्स घटकर 22.94% पर आ गया, जबकि Q3 FY25 में यह 28.12% था। इन सब का सीधा असर EPS (Earnings Per Share) पर पड़ा, जो 77.2% गिरकर ₹1.16 पर आ गया।
9 महीनों के आंकड़े भी चिंताजनक
इस फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें, तो ASL का रेवेन्यू 6.7% बढ़कर ₹3,696 मिलियन हुआ और EBITDA में 17.0% की बढ़ोतरी के साथ ₹958 मिलियन दर्ज किया गया, जिसमें मार्जिन सुधरकर 25.92% हो गया। हालांकि, PAT में 21.4% की गिरावट आई और यह ₹341 मिलियन रहा, वहीं EPS 41.2% घटकर ₹4.78 पर आ गया। नौ महीनों के दौरान भी ब्याज का खर्च 96.3% बढ़ गया, जो कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव दिखा रहा है।
कैश फ्लो और डेट पर खास नज़र
सबसे बड़ा सवाल कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो को लेकर है, जो Q3 FY26 में INR -1,778 मिलियन और 9M FY26 में INR -966 मिलियन रहा। इसका मतलब है कि कंपनी का मुख्य कामकाज ही पर्याप्त कैश जेनरेट नहीं कर पा रहा है, जिससे उसे फाइनेंसिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी का एडजस्टेड सिक्योर नेट डेट टू इक्विटी रेश्यो 1.03 था, जो बताता है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा हुआ है।
आगे की राह और जोखिम
कंपनी Navi Mumbai के रियल एस्टेट मार्केट में ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे NMIA और Atal Setu के चलते लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की उम्मीद जता रही है। साथ ही, एन्युटी इनकम (annuity income) और अलग-अलग सेगमेंट पर फोकस करके कंपनी अपने बिजनेस को डी-रिस्क करने की कोशिश कर रही है। लेकिन, ब्याज के बढ़ते खर्च और नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो जैसे इमीडिएट फाइनेंशियल प्रेशर निवेशकों के लिए बड़े जोखिम हैं। कंपनी को अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए ऑपरेटिंग कैश जेनरेशन को बेहतर करना होगा और कर्ज को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा। कंपनी के पास ₹200 बिलियन का एक बड़ा प्रोजेक्ट पाइपलाइन है (जिसमें ₹125 बिलियन के प्रोजेक्ट्स जारी हैं और ₹75 बिलियन के नए आने हैं), लेकिन इन प्रोजेक्ट्स से कब और कितना कैश आएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।