Apple ने भारत में अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी को और मजबूत करते हुए बेंगलुरु में भारी निवेश किया है। कंपनी ने Embassy Zenith बिल्डिंग में 1.21 लाख वर्ग फुट का नया ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। इस कदम से यह साफ हो गया है कि Apple भारत को अपने ऑपरेशन का एक अहम केंद्र बनाने की योजना बना रहा है।
बेंगलुरु में ऑफिस स्पेस का बड़ा विस्तार
Apple ने बेंगलुरु के Embassy Zenith में 25 सितंबर 2025 से शुरू होने वाले 1.21 लाख वर्ग फुट का अतिरिक्त ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। यह लीज बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथे फ्लोर तक फैली है। इसके लिए कंपनी हर महीने करीब ₹2.84 करोड़ का किराया देगी, जो प्रति वर्ग फुट ₹235 के हिसाब से है।
यह विस्तार कंपनी द्वारा अप्रैल 2025 में इसी बिल्डिंग में लीज पर लिए गए 2.68 लाख वर्ग फुट स्पेस के अतिरिक्त है। अब Apple का इस बिल्डिंग में कुल लीज्ड एरिया करीब 3.89 लाख वर्ग फुट हो गया है। कुल मिलाकर, कंपनी का मासिक रेंटल आउटफ्लो करीब ₹9.16 करोड़ है, और अगले 10 सालों में यह किराया ₹1,333 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। लीज में 3 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले 4.5% की सालाना किराया वृद्धि का क्लॉज भी शामिल है। कंपनी ने ₹14.24 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा की है। इस लीज से Embassy Zenith बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए एक पसंदीदा कैंपस बन गया है, जो इसकी 'Grade A' प्रॉपर्टी स्टेटस को दर्शाता है।
भारत Apple के लिए क्यों बना रणनीतिक केंद्र?
यह विस्तार Apple की भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भारत अब Apple का दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यहां Apple ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में $9 बिलियन का रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया था, जिसमें 13% की वृद्धि देखी गई। सिर्फ कंज्यूमर मार्केट ही नहीं, भारत Apple के लिए मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल बेस के तौर पर भी महत्वपूर्ण हो रहा है। कंपनी अपनी ग्लोबल प्रोडक्शन का लगभग 25% अब भारत में कर रही है, जो चीन से सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। वैश्विक ट्रेड टेंशन और टैरिफ के बीच यह कदम और भी अहम हो जाता है। इसके अलावा, Apple भारत के विभिन्न शहरों में अपने रिटेल स्टोर भी बढ़ा रहा है, जो इस मार्केट के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
भारतीय ऑफिस मार्केट की स्थिति
भारत का ऑफिस मार्केट, खासकर बेंगलुरु, मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है। 2025 में, यहां 83.3 मिलियन वर्ग फुट का रिकॉर्ड ग्रॉस लीजिंग हुआ, जिसमें बेंगलुरु का योगदान 29% रहा। ग्लोबल कंपनियाँ और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) इस ग्रोथ के मुख्य चालक हैं, जिसमें टेक कंपनियाँ सबसे ज्यादा लीजिंग कर रही हैं। Google जैसी कंपनियाँ भी 2.4 मिलियन वर्ग फुट का स्पेस लीज करने की योजना बना रही हैं। इस लगातार डिमांड के कारण 'Grade A' प्रॉपर्टीज में 2-3% की सालाना किराया वृद्धि देखी जा रही है। Embassy Zenith का ₹235 प्रति वर्ग फुट का किराया इस मजबूत मार्केट कंडीशन के अनुरूप है।
जोखिमों पर एक नज़र (Bear Case)
Apple के इस विस्तार के बावजूद कुछ जोखिम भी हैं। कंपनी का स्टॉक हाल में मिश्रित प्रदर्शन दिखा रहा है। इसका P/E रेशियो लगभग 33.5x है, जो ऐतिहासिक औसत और इंडस्ट्री पीयर्स से ऊपर है। एनालिस्ट्स की सिफारिशें भी 5 साल के निचले स्तर पर आ गई हैं, और केवल 55% एनालिस्ट्स ही इसे खरीदने की सलाह दे रहे हैं। भारत में बढ़ती रियल एस्टेट लागत, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और जटिल अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड नीतियां भी चिंता का विषय हैं। हालांकि Apple ने टैरिफ से बचने के लिए प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट किया है, लेकिन ट्रेड डिस्प्यूट्स का भविष्य में कमाई पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना होगा। कंपनी का आईफोन जैसे कुछ खास प्रोडक्ट्स पर अत्यधिक निर्भर होना भी उपभोक्ता मांग में बदलाव और प्रतिस्पर्धी दबावों के प्रति संवेदनशील बनाता है।
भविष्य का अनुमान (Future Outlook)
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले 3-4 सालों में भारत में Apple की ग्रोथ डबल-डिजिट में जारी रहेगी। डिवाइस की बढ़ती मांग, प्रोडक्ट इकोसिस्टम का विस्तार और रिटेल नेटवर्क ग्रोथ इसके मुख्य कारण होंगे। भारत में GCCs और टेक फर्मों का विस्तार 'Grade A' ऑफिस स्पेस की मांग को बनाए रखेगा, जिससे बेंगलुरु में किराए में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। Apple का मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और अब ऑफिस स्पेस में यह बड़ा निवेश, भारत की आर्थिक ग्रोथ का फायदा उठाने और अपनी ग्लोबल ऑपरेशनल फुटप्रिंट को मजबूत करने में मदद करेगा।