Ambassador Hotel पर मालिकाना हक का बड़ा सवाल! दिल्ली HC पहुंची Eviction Notice की लड़ाई

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Ambassador Hotel पर मालिकाना हक का बड़ा सवाल! दिल्ली HC पहुंची Eviction Notice की लड़ाई

दिल्ली के प्रतिष्ठित Ambassador Hotel के मालिक, Sir Sobha Singh & Sons Private Limited, ने 7.58 एकड़ की सुजान सिंह पार्क प्रॉपर्टी से बेदखली के नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के पास इस मामले में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, खासकर तब जब प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक का बड़ा विवाद अभी भी लीगल अपील में है। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि अगली सुनवाई से पहले कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मालिकाना हक़ का टकराव: Ambassador Hotel बनाम L&DO

Sir Sobha Singh & Sons Private Limited, जो नई दिल्ली के मशहूर Ambassador Hotel का संचालन करती है, ने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) द्वारा जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला सुजान सिंह पार्क के 7.58 एकड़ के प्राइम रियल एस्टेट का है, जिसमें होटल के साथ-साथ कई रेजिडेंशियल अपार्टमेंट्स भी शामिल हैं। कंपनी, जो 1943 से इस ज़मीन पर कब्ज़े में है, पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट के तहत तुरंत बेदखली की कार्यवाही को गलत ठहरा रही है।

कानूनीThe arguments: अधिकार क्षेत्र पर सवाल?

शुरुआती सुनवाई के दौरान, कंपनी के वकील ने दलील दी कि जिस एस्टेट ऑफिसर के पास फिलहाल बेदखली की कार्यवाही का जिम्मा है, उसके पास ऐसा करने का ज़रूरी अधिकार क्षेत्र ही नहीं है। याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि प्रॉपर्टी के मालिकाना हक़ का मूल मुद्दा और ज़मीन पर केंद्र सरकार का कथित पुनः प्रवेश—जो 1960 में पहली बार दावा किया गया था—पहले से ही अदालतों में विचाराधीन है। कंपनी का कहना है कि चूंकि मालिकाना हक़ का मामला अभी अपील में है, ऐसे में तुरंत बेदखली के कानूनों का इस्तेमाल गलत और अमान्य है। इसके अलावा, कंपनी का आरोप है कि उसे एस्टेट ऑफिसर के सामने अपने ज़रूरी दस्तावेज़ ठीक से पेश करने से रोका जा रहा है, जिससे यह खतरा पैदा हो गया है कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जा सकता है।

सरकारीThe stance और कोर्ट का जवाब

केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए, L&DO के वकील ने तर्क दिया कि होटल मालिक द्वारा दायर की गई याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट की सख्ती को देखते हुए, सरकार ने यह आश्वासन दिया कि 10 जुलाई, 2026 तक प्रॉपर्टी पर कोई तत्काल बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर ने सरकार और L&DO को तीन हफ़्तों के भीतर याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।

विवाद का ऐतिहासिकThe context

यह वर्तमान विवाद दशकों पुराने एक जटिल कानूनी इतिहास का नतीजा है। निचली अदालत ने पहले प्रॉपर्टी मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसमें 17 साल की अवधि के लिए सरकार के पुनः प्रवेश के प्रयासों को अवैध घोषित किया गया था। हालांकि, इस साल की शुरुआत में एक अपीलीय अदालत ने इस फैसले को पलट दिया था। अब कंपनी उस अपीलीय फैसले को दूसरी अपील में चुनौती दे रही है। एक बड़ा विवाद यह भी है कि कंपनी का आरोप है कि वर्तमान बेदखली नोटिस अपीलीय फैसले पर आधारित है, जबकि यूनियन सरकार ने पहले यह आश्वासन दिया था कि पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही उस फैसले से स्वतंत्र रहेगी। निवेशकों और हितधारकों को आगामी अदालती filings और सुनवाई पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इसका नतीजा इस हाई-वैल्यू रियल एस्टेट संपत्ति की भविष्य की स्थिति और Ambassador Hotel के संचालन के भविष्य को तय करेगा।

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