भारत में Airbnb होस्ट की कमाई पर बड़ा असर पड़ा है। खास शहरों में लिस्टिंग की बाढ़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते प्रति रात की दरें (nightly rates) कम हो रही हैं। ऐसे में कई प्रॉपर्टी मालिक अब लॉन्ग-टर्म रेंटल की ओर लौट रहे हैं, भले ही कंपनी ग्लोबल लेवल पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हो।
Airbnb होस्ट्स को क्यों लग रहा है झटका?
भारत के प्रॉपर्टी मालिकों के लिए Airbnb जैसे प्लेटफॉर्म पर छोटे समय के लिए प्रॉपर्टी किराए पर देकर मोटी कमाई करना अब मुश्किल होता जा रहा है। प्रॉपर्टी की लिस्टिंग में भारी उछाल आया है, जिससे रातों-रात मिलने वाले किराए में कमी आई है। इस वजह से कई होस्ट्स अपने बिजनेस मॉडल पर दोबारा विचार कर रहे हैं और पारंपरिक, लंबे समय के लिए प्रॉपर्टी किराए पर देने की ओर लौट रहे हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
30 जून 2026 तक के मार्केट आंकड़े बताते हैं कि इस प्रतिस्पर्धा का लेवल क्या है। हैदराबाद जैसे शहरों में पिछले एक साल में लिस्टिंग 72% बढ़ी है, जबकि अहमदाबाद में इसमें 21% का इजाफा हुआ। सप्लाई में आई इस तेज बढ़ोतरी ने कीमतों पर दबाव बनाया है। मुंबई में औसत दैनिक दरें (average daily rates) 6.5% गिरी हैं, तो जोधपुर में इसमें 43% की भारी गिरावट देखी गई है। इसके नतीजे के तौर पर, गोवा, जयपुर, उदयपुर और वाराणसी जैसे टूरिस्ट हब में प्रॉपर्टी मालिकों ने 7% से 14% तक रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की है।
बढ़ता बोझ, घटता मुनाफा
कई छोटे प्रॉपर्टी मालिकों के लिए, शॉर्ट-टर्म रेंटल का बिजनेस अब पहले जैसा एफिशिएंट नहीं रहा। भारत में पारंपरिक रेंटल प्रॉपर्टी से आमतौर पर 2% से 4% तक का यील्ड (yield) मिलता है। जहां Airbnb एक समय में इससे कहीं ज्यादा रिटर्न का वादा करता था, वहीं अब मेंटेनेंस, गेस्ट मैनेजमेंट और आखिरी मिनट कैंसलेशन जैसी दिक्कतों ने इसके फायदों पर पानी फेर दिया है। इसके अलावा, 15.5% प्लेटफॉर्म फीस का लागू होना, जिसका भार अब होस्ट्स को उठाना पड़ रहा है, प्रॉफिट मार्जिन को और कम कर रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ होस्ट्स ने अपनी कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन पहले से ही भरी हुई मार्केट में बुकिंग कम होने का रिस्क भी बढ़ा है।
ग्लोबल परफॉरमेंस vs लोकल रियलिटी
यहां एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है - भारतीय होस्ट्स का अनुभव और पैरेंट कंपनी का परफॉरमेंस। Airbnb ने 2026 की दूसरी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए, जिसमें रेवेन्यू 17% बढ़कर $3.61 बिलियन तक पहुंच गया। अगस्त 2026 में ग्लोबल ग्रोथ और इंटरनल एफिशिएंसी के सपोर्ट से कंपनी का स्टॉक मल्टी-ईयर हाई पर पहुंच गया। यह दिखाता है कि जहां कंपनी ग्लोबल लेवल पर तरक्की कर रही है, वहीं लोकल मार्केट में बढ़ी हुई सप्लाई की वजह से इंडिविजुअल प्रॉपर्टी मालिकों की कमाई की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है।
आगे क्या?
होस्ट्स के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या टियर 2 और टियर 3 शहरों में डिमांड, उपलब्ध प्रॉपर्टी की बढ़ती इन्वेंट्री के साथ तालमेल बिठा पाएगी। बहुत से मालिक अब लॉन्ग-टर्म रेंटल की निश्चितता को चुन रहे हैं, जिसमें कम मेहनत लगती है और एक स्थिर कैश फ्लो मिलता है। निवेशकों और प्रॉपर्टी मालिकों के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या प्रति रात की दरें स्थिर होंगी या फिर ओवरसैचुरेटेड शॉर्ट-टर्म रेंटल मार्केट के जवाब में पारंपरिक, लॉन्ग-टर्म लीजिंग की ओर यह बदलाव जारी रहेगा।
