Affordable Housing Market: घर खरीदारों के लिए बुरी खबर! सस्ते घरों की सप्लाई घटकर **17%** पर सिमटी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Affordable Housing Market: घर खरीदारों के लिए बुरी खबर! सस्ते घरों की सप्लाई घटकर **17%** पर सिमटी

देश के रियल एस्टेट मार्केट में **₹50 लाख** से कम कीमत वाले नए घरों की सप्लाई गिरकर अब केवल **17%** रह गई है। जमीन और कंस्ट्रक्शन की बढ़ती कीमतों के चलते डेवलपर्स अब प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और रेंटल मॉडल की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

भारत में अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा लगातार सिमट रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, ₹50 लाख से सस्ती प्रॉपर्टीज अब बाजार में आने वाली कुल नई सप्लाई का महज 17% हिस्सा हैं। टियर-1 शहरों में जमीन की खरीद, निर्माण लागत और सरकारी लेवी (Govt Levies) का बोझ इतना अधिक है कि डेवलपर्स के लिए कम बजट के प्रोजेक्ट्स निकालना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

मार्जिन का गणित और बदलती प्राथमिकता

मुंबई जैसे बड़े शहरों में सरकारी फीस और जमीन की कीमतों में ही प्रोजेक्ट की कुल लागत का लगभग 50% खर्च हो जाता है। यही कारण है कि बड़े प्राइवेट डेवलपर्स अब लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, जहां मुनाफा अधिक और स्थिर है। इसी वजह से मार्केट में मिड-टू-हाई एंड प्रोजेक्ट्स की भरमार है, जबकि अफोर्डेबल सेगमेंट पिछड़ता जा रहा है।

रेंटल हाउसिंग: नया ट्रेंड

डेवलपर्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स अब 'इंस्टीट्यूशनल रेंटल हाउसिंग' मॉडल की तरफ रुख कर रहे हैं। Brookfield REIT जैसे बड़े खिलाड़ी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इनका मानना है कि अफोर्डेबिलिटी को केवल घर की कीमत से नहीं, बल्कि ऑफिस से दूरी और यात्रा खर्च के नजरिए से भी देखना चाहिए। अब इंडस्ट्रियल हाउसिंग, स्टूडेंट हाउसिंग और सीनियर लिविंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जो ट्रेडिशनल 'बिल्ड-एंड-सेल' मॉडल के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

निवेशकों के लिए सीख

रियल एस्टेट सेक्टर में हो रहा यह बदलाव इशारा करता है कि कंपनियां अब वॉल्यूम के बजाय फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी पर जोर दे रही हैं। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो प्रोजेक्ट अप्रूवल और जमीन से जुड़ी रेगुलेटरी बाधाओं को बेहतर तरीके से पार कर सकती हैं। आने वाले समय में रेंटल हाउसिंग के लिए सरकारी टैक्स इंसेंटिव और फास्ट-ट्रैक अप्रूवल जैसे नीतिगत फैसले इस सेक्टर की अगली दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.