नतीजों में फिसड्डी, पर आगे क्या?
कंपनी के Q3 FY26 के नतीजे बताते हैं कि ₹25.4 अरब की सेल्स (presales) हुई। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 276% और पिछली तिमाही के मुकाबले 185% ज्यादा है। मगर, यह एनालिस्ट्स के अनुमान से 29% पीछे रह गई।
इसके अलावा, ABREL ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने के अनुमान को ₹139 अरब से घटाकर ₹88 अरब कर दिया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 'बिरला नियारा' (Birla Niyaara) टॉवर सी और 'बिरला नव्या' (Birla Navya) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स अब इस साल की जगह अगले फाइनेंशियल ईयर FY27 में लॉन्च होंगे। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (9MFY26) में ABREL की कुल सेल्स ₹38 अरब रही, जो पिछले साल से 64% ज्यादा है।
ब्रोकरेज का भरोसा कायम
इन खराब नतीजों और घटाई गई लॉन्च गाइडेंस के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने ABREL के शेयर पर अपना 'BUY' रेटिंग बरकरार रखा है। उन्होंने कंपनी का टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,988 कर दिया है, जो मौजूदा भाव से करीब 55% की तेजी का संकेत देता है। यह एनालिस्ट्स का भरोसा कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ या असेट वैल्यू पर है। हालांकि, कंपनी का P/E रेश्यो और ROE अभी भी नेगेटिव में हैं, जो कुछ चिंताएं पैदा करते हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी
ABREL की यह हालत सिर्फ कंपनी की वजह से नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में चल रही गिरावट का भी नतीजा है। Nifty Realty इंडेक्स इस साल अब तक लगभग 12% गिर चुका है। Godrej Properties, Lodha Developers, Oberoi Realty और DLF जैसे बड़े डेवलपर्स के शेयरों में भी भारी गिरावट आई है। कई दिग्गज डेवलपर्स ने अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर को छुआ है। उदाहरण के लिए, Oberoi Realty की Q3 बिक्री 56% गिरी। जबकि कुछ कंपनियों जैसे Prestige Estates ने रिकॉर्ड बिक्री की है, पर कुल मिलाकर बाज़ार में निराशा का माहौल है।
भविष्य की राह
Aditya Birla Group की इस कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹14,000 करोड़ है। शेयर में पिछले एक साल में -42% से ज्यादा की गिरावट आई है और यह अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर (₹1,231) के करीब कारोबार कर रहा है। हालांकि, कंपनी की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग CRISIL AA/Stable जैसी मजबूत बनी हुई है। Nomura जैसी ब्रोकरेज फर्म भी ABREL पर पॉजिटिव हैं और इसे Lodha Developers व Prestige Estates के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वालों में गिन रही हैं। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपनी घटाई गई लॉन्च योजनाओं को कैसे लागू करती है और प्रीमियम हाउसिंग की मांग का कितना फायदा उठा पाती है।