Tata Sons का बड़ा दांव: IPO से बचने के लिए कंपनी करेगी यह बड़ा बदलाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Sons का बड़ा दांव: IPO से बचने के लिए कंपनी करेगी यह बड़ा बदलाव

Tata Sons ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों, Tata Electronics Systems Solutions और Tata Consulting Engineers को खुद में मर्ज करने का प्लान बनाया है। इस कदम का मकसद कंपनी का बिजनेस क्लासिफिकेशन बदलना है, ताकि वह RBI के उस नियम से बच सके जिसके तहत उसे पब्लिक लिस्टिंग (IPO) करानी पड़ सकती थी।

रेगुलेटरी नियमों से बचने की कोशिश

Tata Sons वर्तमान में 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) के रूप में वर्गीकृत है। RBI के नियमों के अनुसार, अपर-लेयर की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए पब्लिक लिस्टिंग अनिवार्य है। इस लिस्टिंग से बचने के लिए Tata Sons अब अपनी ऑपरेटिंग कंपनियों को सीधे पैरेंट कंपनी में मिला रही है, ताकि इसे सिर्फ एक 'इन्वेस्टमेंट होल्डिंग' कंपनी के बजाय एक 'ऑपरेटिंग एंटिटी' के रूप में देखा जाए।

क्या हैं आंकड़े?

प्रस्तावित बदलाव के बाद, कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू कुल कमाई के 64% से अधिक होने का अनुमान है। अगर हम आंकड़ों को देखें, तो ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,05,043 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि फाइनेंशियल इनकम ₹40,072 करोड़ रहने का अनुमान है। इस पुनर्गठन के साथ, ग्रुप अपनी कुल नेट एसेट वैल्यू को ₹2,00,158 करोड़ तक ले जाना चाहता है, जिससे ग्रुप का इन्वेस्टमेंट 90% के रेगुलेटरी थ्रेशोल्ड से घटकर 88.5% पर आ जाएगा।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

बाजार में लंबे समय से Tata Sons के IPO को लेकर चर्चा थी, लेकिन यह कदम साफ करता है कि मैनेजमेंट ग्रुप को प्राइवेट स्ट्रक्चर में ही रखना चाहता है। यह मॉडल कंपनी के लिए नया नहीं है, क्योंकि अतीत में भी TCS जैसे कई बिजनेस इसी तरह काम करते थे। हालांकि, इस पूरे प्लान को पूरा करने के लिए RBI की मंजूरी और 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) का मिलना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.