तमिलनाडु सरकार ने राज्य के शहरी निकायों के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब **₹10 करोड़** से बड़े किसी भी प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार से मंज़ूरी लेनी होगी। यह कदम ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) में **₹2,000 करोड़** के भारी घाटे और लंबित बिलों के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद वित्तीय अनुशासन बढ़ाना है।
प्रोजेक्ट्स पर अब सरकारी लगाम
तमिलनाडु के म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन और वाटर सप्लाई (MAWS) डिपार्टमेंट ने पूरे राज्य में शहरी स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय निगरानी को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत, ₹10 करोड़ से ज़्यादा की लागत वाले किसी भी प्रोजेक्ट को अब सरकारी मंजूरी मिलनी ही चाहिए। इस नियम का एक अहम पहलू यह भी है कि बड़े कामों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूरी लेने की कोशिशों पर रोक लगा दी गई है, जो पहले बड़ी परियोजनाओं की जांच से बचने के लिए किया जाता था।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की माली हालत!
यह नया नियम ऐसे समय में आया है जब ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। मार्च 2026 तक, कॉर्पोरेशन पर लगभग ₹2,000 करोड़ के बिलों का भुगतान बकाया था, और इसका राजकोषीय घाटा ₹1,970 करोड़ था। वित्तीय अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 फाइनेंशियल ईयर में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण रह सकती है, जिसमें ₹1,500 करोड़ की अतिरिक्त देनदारियों का अनुमान है। अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो कॉर्पोरेशन पर कुल ₹3,500 करोड़ का वित्तीय बोझ आ सकता है।
ज़रूरी खर्चों को प्राथमिकता
सरकार के इस निर्देश के बाद, शहरी निकायों को खर्चों को लेकर सख्त प्राथमिकता तय करनी होगी। अब कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और प्रॉविडेंट फंड जैसे अनिवार्य भुगतानों को किसी भी नए इंफ्रास्ट्रक्चर या बड़े प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले निपटाना होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कैश फ्लो की कमी के दौरान भी जरूरी नागरिक सेवाएं बाधित न हों।
रेवेन्यू कलेक्शन के प्रयास
लगातार वित्तीय दबाव के बावजूद, GCC ने रेवेन्यू कलेक्शन में तेजी लाकर अपनी कैश पोजीशन को बेहतर बनाने की कोशिश की है। आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में प्रॉपर्टी टैक्स से ₹158 करोड़ की वसूली हुई, जो जुलाई 2025 में हुए ₹61 करोड़ से काफी ज़्यादा है। हालांकि, यह कलेक्शन में बढ़ोतरी कॉर्पोरेशन के कैश फ्लो के लिए सकारात्मक है, लेकिन बकाया बिलों की भारी राशि और रखरखाव की जरूरतें बनी हुई हैं, इसलिए राज्य सरकार के लिए वित्तीय निगरानी एक प्राथमिकता रहेगी।
