Income Tax: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना नोटिस के हुआ री-असेसमेंट तो होगा अवैध

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AuthorMehul Desai|Published at:
Income Tax: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना नोटिस के हुआ री-असेसमेंट तो होगा अवैध

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा अनिवार्य नोटिस (Section 143(2)) न भेजने पर री-असेसमेंट की कार्यवाही अवैध मानी जाएगी। टैक्सपेयर्स की भागीदारी इस कमी को पूरा नहीं कर सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मनमानी पर लगाम लगाते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने साफ कहा है कि इनकम टैक्स एक्ट के Section 143(2) के तहत नोटिस जारी करना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। यदि विभाग यह नोटिस नहीं भेजता है, तो पूरी री-असेसमेंट प्रक्रिया कानूनी रूप से शून्य (null and void) मानी जाएगी।

कानूनी आवश्यकता (Legal Requirement)

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Section 143(2) के तहत नोटिस जारी करना एक 'Jurisdictional' जरूरत है। पहले विभाग तर्क देता था कि यदि टैक्सपेयर ने अन्य संचारों, जैसे कि Section 142(1) का जवाब दिया है, तो नोटिस न होना एक मामूली प्रक्रियात्मक त्रुटि है। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है। बिना इस नोटिस के, विभाग के पास असेसमेंट आगे बढ़ाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

Section 292BB पर स्पष्टीकरण

अक्सर अधिकारी Section 292BB का सहारा लेकर यह तर्क देते थे कि यदि टैक्सपेयर ने कार्यवाही में हिस्सा लिया है, तो उसने प्रक्रियात्मक खामियों को मान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या को पूरी तरह से पलट दिया है। कोर्ट ने नोटिस के 'जारी होने' (Issuance) और 'सर्व होने' (Service) के बीच बड़ा अंतर स्पष्ट किया है। Section 292BB अब केवल उन्हीं मामलों तक सीमित रहेगा जहां नोटिस भेजा गया था, लेकिन डिलीवरी में कोई तकनीकी समस्या आई हो। यदि विभाग ने नोटिस जारी ही नहीं किया, तो यह धारा उसे कोई सुरक्षा नहीं देगी।

टैक्सपेयर्स के लिए असर

यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी जीत है जो बरसों से टैक्स विवादों में फंसे हुए हैं। कई टैक्सपेयर्स डर या जानकारी की कमी के कारण कानूनी रूप से गलत प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे। अब जिम्मेदारी पूरी तरह से विभाग पर है कि वह कानून का सख्ती से पालन करे।

आगे क्या करें?

अगर आप या आपकी कंपनी किसी पेंडिंग टैक्स असेसमेंट विवाद में उलझी है, तो अपने केस फाइल्स की दोबारा जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया की शुरुआत में Section 143(2) का वैध नोटिस भेजा गया था या नहीं। यदि नोटिस गायब है, तो यह फैसला आपके लिए एक मजबूत कानूनी हथियार साबित हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.