महंगाई को काबू करने के लिए RBI जल्द ही बड़ा कदम उठा सकता है। SBI Research के मुताबिक, अक्टूबर और दिसंबर में **25-25 बेसिस पॉइंट्स** की दो बार ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, जिससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा।
महंगाई का दायरा बढ़ रहा है
भारत में रिटेल महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई है, जो जुलाई में 4.45% पर थी। RBI के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि महंगाई अब कुछ चुनिंदा सामानों तक सीमित न रहकर व्यापक होती जा रही है। SBI Research की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई में योगदान देने वाली कमोडिटीज की संख्या 2026 की शुरुआत में 22 थी, जो अगस्त में बढ़कर 51 हो गई है।
क्रूड ऑयल का दबाव
ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं, तो आने वाले महीनों में हेडलाइन महंगाई दर 6.5% या उससे ऊपर जा सकती है। यह मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स के खर्च को सीधे तौर पर बढ़ा रहा है।
मार्केट और कॉर्पोरेट जगत पर असर
इस खबर के बाद 15 सितंबर, 2026 को सेंसेक्स में करीब 2% की गिरावट देखी गई। वहीं, बॉन्ड यील्ड्स का बढ़ना भी जारी है—अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के पार और भारतीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 7.10% के करीब पहुंच गई हैं। बढ़ती ब्याज दरों के कारण कंपनियों के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
ब्याज दरें बढ़ने से बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब अक्टूबर में होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग पर है। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल के भाव और 96 प्रति डॉलर के करीब दबाव झेल रहे भारतीय रुपये पर भी निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
