भारतीय रुपया (Rupee) एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा डॉलर की सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और सरकारी तेल कंपनियों के लिए सीधे डॉलर विंडो खोलने से करेंसी में इस हफ्ते **2%** का उछाल आया है।
बाजार में सुधार का दौर
14 अक्टूबर 2026 को भारतीय रुपया मजबूत होकर 94.91 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह रिकवरी उस समय आई है जब हाल ही में रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 के करीब पहुंच गया था। इस सुधार के पीछे RBI की 10 अक्टूबर को घोषित की गई दोहरी रणनीति है।
तेल कंपनियों के लिए राहत
RBI ने स्पॉट मार्केट में डॉलर की डिमांड को कम करने के लिए तीन सरकारी तेल कंपनियों - Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation और Bharat Petroleum Corporation - के लिए एक डेडिकेटेड डॉलर सुविधा शुरू की है। अब इन कंपनियों को खुले बाजार से डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं होगी, जिससे रुपये पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम हो गया है।
सट्टेबाजी पर RBI का 'ब्रेक'
सेंट्रल बैंक ने फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में सट्टेबाजी को रोकने के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। अब बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले डेरिवेटिव्स की सीमा $100 मिलियन से घटाकर महज $5 मिलियन कर दी गई है। साथ ही, $2 मिलियन से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 20% का फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व अनिवार्य कर दिया गया है। इन फैसलों से करेंसी डेरिवेटिव्स में इंट्रा-डे ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि ये कदम रुपये के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं, लेकिन इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। तेल कंपनियों को सीधे डॉलर सप्लाई करने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, 20% रिस्क रिजर्व की शर्त से बैंकों और कॉरपोरेट्स की हेजिंग लागत बढ़ गई है, जो उनके मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रुपया बिना विदेशी भंडार के ज्यादा इस्तेमाल के इन स्तरों पर टिका रह पाएगा।
