पूर्व RBI गवर्नर Raghuram Rajan ने भारतीय रिजर्व बैंक को सलाह दी है कि वह रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) खर्च करना बंद करे। इस साल रुपये में **6%** की गिरावट आई है और यह **97** के स्तर के पास पहुंच गया है।
बाजार हस्तक्षेप की भारी कीमत
आंकड़ों के अनुसार, जून से अब तक RBI ने रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए स्पॉट डॉलर सेल और करेंसी स्वैप के जरिए $75 बिलियन से $80 बिलियन तक खर्च किए हैं। Raghuram Rajan का मानना है कि रुपये की रक्षा के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इतना बड़ा हिस्सा खर्च करना लंबी अवधि के लिए टिकाऊ नहीं है। उनका तर्क है कि इन फंड्स पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, खासकर जब बाहरी दबाव काफी अधिक हो।
रिजर्व और एक्सपोर्ट के बीच संतुलन
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे करेंसी वैश्विक ऊर्जा कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील हो जाती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।
Rajan के अनुसार, नीति निर्माताओं को कमजोर करेंसी से डरने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, एक नियंत्रित डेप्रिसिएशन (Depreciation) भारतीय निर्यात (Exports) को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उच्च तेल कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी (Capital Outflows) के बीच बाजार में हस्तक्षेप जारी रहा, तो इससे रिजर्व में कमी आ सकती है, जिसकी जरूरत देश को भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए हो सकती है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या RBI अपनी इंटरवेंशन रणनीति में कोई बदलाव करेगा। बाजार सहभागियों को अब ट्रेड बैलेंस डेटा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के फ्लो पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
