RBI का ₹2.5 लाख करोड़ का लिक्विडिटी दांव, SBI Capital ने उठाए सवाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का ₹2.5 लाख करोड़ का लिक्विडिटी दांव, SBI Capital ने उठाए सवाल

RBI ने बैंकिंग सिस्टम में अचानक ₹2.5 लाख करोड़ की लिक्विडिटी डाली है, जिस पर SBI Capital ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम बैंक की 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) की नीति से मेल नहीं खाता, जिससे निवेशकों के बीच कन्फ्यूजन बढ़ गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 19 अक्टूबर के सप्ताह में वेरिएबल रेपो रेट (VRR) ऑक्शन के जरिए बैंकिंग सिस्टम में ₹2.5 लाख करोड़ की भारी नकदी डालने के फैसले पर बहस छिड़ गई है। केंद्रीय बैंक का यह कदम उसकी खुद की पॉलिसी गाइडेंस के साथ विरोधाभासी माना जा रहा है।

क्या है पॉलिसी का पेंच?

मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का संकल्प दोहराया था, जिसका उद्देश्य महंगाई को काबू में रखने के लिए मार्केट में मनी सप्लाई को सीमित रखना है। लेकिन, हालिया कैश इन्फ्यूजन ने विशेषज्ञों को उलझन में डाल दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्या कांति घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह कदम बाजार में अनिश्चितता पैदा करता है क्योंकि यह सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों से अलग दिखता है।

मिक्स्ड सिग्नल्स से बाजार परेशान

बाजार के जानकारों को इस बात की चिंता है कि RBI एक तरफ लिक्विडिटी सोखने के लिए वेरिएबल रिवर्स रेपो रेट (VRRR) और ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) का उपयोग कर रहा है, तो दूसरी तरफ रेपो ऑक्शन के जरिए पैसे भी डाल रहा है। यह 'दोहरी चाल' निवेशकों को यह समझने नहीं दे रही है कि केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता महंगाई से लड़ना है या लिक्विडिटी मैनेज करना।

निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

RBI का तर्क है कि उसे घरेलू महंगाई और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। निवेशकों के लिए अब अगले पॉलिसी साइकिल्स पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि केंद्रीय बैंक इसी तरह लिक्विडिटी को लेकर बार-बार अपनी दिशा बदलता रहा, तो ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अनुमान लगाना और मुश्किल हो जाएगा। बाजार को अब आगे के ऑक्शन डेटा और RBI की आधिकारिक कमेंट्री का इंतजार है ताकि यह साफ हो सके कि यह कदम सिर्फ एक अस्थायी राहत थी या नीति में बड़ा बदलाव।

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