RBI के डिप्टी गवर्नर SC Murmu ने साफ किया है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) में बदलाव से डिजिटल पेमेंट पर असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, अब कंपनियों के बोर्ड को AI के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों की पूरी जवाबदेही लेनी होगी।
RBI ने मुंबई में आयोजित एक फाइनेंशियल कॉन्क्लेव में डिजिटल पेमेंट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। डिप्टी गवर्नर SC Murmu ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि लागत ढांचे में बदलाव कोई जोखिम नहीं, बल्कि एक सामान्य बदलाव है।
डिजिटल और कैश का समीकरण
निवेशकों के बीच अक्सर यह चर्चा होती है कि UPI की रिकॉर्ड ग्रोथ के बावजूद कैश का चलन क्यों बढ़ रहा है। RBI ने स्पष्ट किया है कि कैश अब ट्रांजैक्शन से ज्यादा 'स्टोर ऑफ वैल्यू' के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। अर्थव्यवस्था बढ़ने के साथ नकदी का बढ़ना डिजिटल क्रांति के खिलाफ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
AI के दौर में बोर्ड की जिम्मेदारी
RBI ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। नए निर्देश के अनुसार, यदि कोई कंपनी AI का उपयोग करती है, तो किसी भी तकनीकी खराबी, वित्तीय नुकसान या अनुपालन (Compliance) उल्लंघन के लिए सीधे कंपनी का बोर्ड जिम्मेदार होगा। इसका मतलब है कि भविष्य में फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों का अनुपालन खर्च बढ़ सकता है, क्योंकि बोर्ड को अब तकनीक को बारीकी से समझना होगा।
फ्रॉड पर लगाम और नियमों का सरलीकरण
सिस्टमैटिक फ्रॉड को रोकने के लिए RBI एक 'डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म' तैयार कर रहा है। इसका लक्ष्य नेटवर्क स्तर पर सुरक्षा को मजबूत करना है। साथ ही, अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए RBI विनियमित संस्थाओं को 11 अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। निवेशकों की नजर अब इस नए इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के रोलआउट पर रहेगी, जो डिजिटल फ्रॉड को रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
