RBI का बड़ा ऐलान: ब्लॉकचेन के जरिए टोकनाइजेशन का विस्तार, अब गोल्ड और बॉन्ड भी होंगे डिजिटल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI का बड़ा ऐलान: ब्लॉकचेन के जरिए टोकनाइजेशन का विस्तार, अब गोल्ड और बॉन्ड भी होंगे डिजिटल

RBI ने अपने ब्लॉकचेन-आधारित टोकनाइजेशन प्रोग्राम को विस्तार देने का फैसला किया है। सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CDs) के सफल परीक्षण के बाद, अब रेगुलेटर 'एटॉमिक सेटलमेंट' के जरिए मार्केट की एफिशिएंसी बढ़ाने और रिस्क को कम करने की तैयारी कर रहा है।

शुरुआती पायलट की कामयाबी

सेंट्रल बैंक का भरोसा सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CDs) के सफल पायलट प्रोजेक्ट से बढ़ा है। इस परीक्षण के दौरान करीब 249 ट्रांजैक्शंस किए गए, जिनकी कुल वैल्यू ₹17,000 करोड़ रही। इस कामयाबी के बाद अब RBI कॉरपोरेट बॉन्ड और गोल्ड जैसे एसेट्स को भी यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस (UMI) से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

क्या है 'एटॉमिक सेटलमेंट' का खेल?

पारंपरिक फाइनेंस में ट्रेड और फंड ट्रांसफर के बीच समय का अंतर होता है, जिससे रिस्क बना रहता है। अब होलसेल CBDC के जरिए RBI 'एटॉमिक सेटलमेंट' का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसमें एसेट और कैश का आदान-प्रदान एक ही पल में होगा, जिससे कैपिटल की ब्लॉक होने वाली समस्या खत्म हो जाएगी।

प्रोग्रामेबल फाइनेंस की ओर कदम

टोकनाइजेशन का मतलब सिर्फ स्पीड नहीं, बल्कि 'प्रोग्रामेबल फाइनेंस' है। डिजिटल टोकन में पहले से तय नियम होने के कारण ओनरशिप और ट्रांसफर का पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक हो जाएगा। इससे मैन्युअल वेरिफिकेशन की जरूरत खत्म होगी और ऑपरेशनल गलतियों में कमी आएगी।

चुनौतियां और रिस्क

हालांकि, तकनीक के अपने फायदे हैं, लेकिन सिस्टम की स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। ट्रांजैक्शन की रफ्तार बढ़ने के साथ लेवरेज का रिस्क भी बढ़ सकता है, जिसे रेगुलेटर को बारीकी से मॉनिटर करना होगा। साथ ही, डेटा प्राइवेसी और मौजूदा मार्केट इंटरमीडियरीज, जैसे कस्टोडियन और डिपॉजिटरी, की भूमिका में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखना जरूरी है। RBI ने साफ किया है कि वे इस पूरे बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.