RBI का बड़ा कदम: मार्केट से ₹4 लाख करोड़ लिक्विडिटी खींचेगा रिजर्व बैंक, बॉन्ड यील्ड पर दिखेगा असर

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा कदम: मार्केट से ₹4 लाख करोड़ लिक्विडिटी खींचेगा रिजर्व बैंक, बॉन्ड यील्ड पर दिखेगा असर

बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी लिक्विडिटी को काबू में करने के लिए RBI ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। सितंबर में सरप्लस ₹11 लाख करोड़ के पार जाने के बाद, रिजर्व बैंक अब ₹4 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से बाहर निकालने की तैयारी में है, जिसके लिए OMO के जरिए बॉन्ड बेचे जाएंगे।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई नकदी को सामान्य करने की कवायद तेज कर दी है। हाल ही में सिस्टम में सरप्लस नकदी का आंकड़ा ₹11 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया था। इसकी मुख्य वजह डॉलर-रुपया स्वैप फैसिलिटी के जरिए आया $136 बिलियन से अधिक का फॉरेन करेंसी इनफ्लो है।

लिक्विडिटी कम करने का प्लान

RBI अब ₹4 लाख करोड़ की 'ड्यूरेबल' लिक्विडिटी को सोखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए 'ओपन मार्केट ऑपरेशंस' (OMO) का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें सेंट्रल बैंक बैंकों को सरकारी बॉन्ड बेचकर सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश निकालता है। RBI ने ₹1 लाख करोड़ के बॉन्ड बेचने का शेड्यूल भी जारी कर दिया है, जिसकी नीलामी 17, 21 और 28 सितंबर को होगी। इसके अलावा, शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए VRRR (वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो) का इस्तेमाल जारी रहेगा।

बॉन्ड यील्ड और कर्ज पर असर

RBI के इन फैसलों का असर मार्केट में दिखने लगा है। बॉन्ड बिक्री की आहट से 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 7.04% पर पहुंच गई है। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण ट्रिगर है, क्योंकि सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से पूरी इकॉनमी के लिए बेंचमार्क रेट ऊपर चला जाता है। इसका मतलब यह है कि प्राइवेट कंपनियों के लिए भी लोन लेना महंगा हो सकता है, क्योंकि उन्हें सुरक्षित सरकारी बॉन्ड के मुकाबले ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा।

लंबी चुनौती

IDFC फर्स्ट बैंक के जानकारों के मुताबिक, इस पूरी लिक्विडिटी को सोखने की प्रक्रिया फाइनेंशियल ईयर 2027-28 की दूसरी तिमाही तक खिंच सकती है। RBI के सामने चुनौती यह है कि अगर लिक्विडिटी बहुत धीरे निकाली गई, तो शॉर्ट-टर्म रेट्स रेपो रेट से काफी नीचे गिर सकते हैं और इन्फ्लेशन पर कंट्रोल कम हो सकता है। वहीं, बहुत ज्यादा सख्ती से लिक्विडिटी क्रंच का खतरा भी पैदा हो सकता है। आगामी ऑक्शन के नतीजे यह तय करेंगे कि मार्केट में कितनी हलचल मचेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.