RBI का बड़ा फैसला: सिस्टम से निकलेगा **₹1 लाख करोड़** का लिक्विडिटी, क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं बॉन्ड यील्ड्स?

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: सिस्टम से निकलेगा **₹1 लाख करोड़** का लिक्विडिटी, क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं बॉन्ड यील्ड्स?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए **₹1 लाख करोड़** के सरकारी बॉन्ड बेचने का ऐलान किया है। इस खबर के बाद बॉन्ड यील्ड्स में उछाल आया है, क्योंकि मार्केट अब सप्लाई बढ़ने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। **17 सितंबर** से शुरू होने वाली यह नीलामी महंगाई और सरकारी उधार के बीच बाजार की डिमांड के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

RBI की लिक्विडिटी स्ट्रैटेजी

केंद्रीय बैंक ने लंबे समय बाद ₹1 लाख करोड़ की सरकारी सिक्योरिटीज़ को बेचने का फैसला किया है। यह कदम सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए उठाया गया है, जो मुख्य रूप से फॉरेन करेंसी के भारी इनफ्लो (Inflows) के कारण जमा हुई थी।

नीलामी का शेड्यूल (Auction Schedule)

यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी:

  • 17 सितंबर: ₹50,000 करोड़ की नीलामी।
  • 21 सितंबर: ₹25,000 करोड़ की नीलामी।
  • 28 सितंबर: ₹25,000 करोड़ की नीलामी।

बॉन्ड यील्ड्स का गणित

बॉन्ड की कीमतों और यील्ड का उल्टा रिश्ता होता है। जब RBI बॉन्ड बेचता है, तो बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है, जिससे कीमतें गिरती हैं और यील्ड्स ऊपर चढ़ते हैं। इस घोषणा के बाद 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.035% के स्तर पर पहुंच गया है।

निवेशकों के लिए जोखिम

बैंकों के पास सरकारी बॉन्ड का बड़ा पोर्टफोलियो होता है। जब यील्ड्स बढ़ते हैं, तो इन बॉन्ड्स की मार्केट वैल्यू कम हो जाती है, जिससे बैंकों के ट्रेजरी पोर्टफोलियो और मुनाफे पर दबाव बढ़ना तय है। इसके अलावा, महंगाई और कच्चे तेल (Crude Oil) की अस्थिर कीमतें भी मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही हैं, जिससे बॉरोइंग कॉस्ट लंबे समय तक ऊंची रह सकती है।

अब बाजार की नजर 17 सितंबर की पहली नीलामी पर टिकी है, जिससे यह साफ होगा कि निवेशक मौजूदा यील्ड लेवल्स पर कितना रिस्पॉन्स देते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.