Global FinTech Fest 2026 में RBI ने UPI ट्रांजैक्शन के भारी आंकड़ों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अब बैंकों और फिनटेक कंपनियों को सुरक्षा और फ्रॉड डिटेक्शन पर भारी निवेश करना होगा।
सुरक्षा पर RBI का कड़ा रुख
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की मजबूती के लिए नया निर्देश जारी किया है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में गवर्नर संजय मल्होत्रा और डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने साफ किया कि 24,162 करोड़ के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के साथ अब ऑपरेशनल रेजिलिएंस (Operational Resilience) से समझौता नहीं किया जा सकता। देश के कुल डिजिटल पेमेंट्स में UPI की हिस्सेदारी 85% तक पहुंच गई है, ऐसे में एक छोटी सी तकनीकी चूक पूरे सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
'MuleHunter.AI' का जाल
फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए RBI ने 'MuleHunter.AI' पहल शुरू की है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल घोटालों को पकड़ने के लिए 31 प्रमुख बैंकों में एक्टिव कर दिया गया है।
भविष्य की चुनौतियां और निवेश
RBI अब 'क्वांटम-प्रूफिंग' (Quantum-proofing) पर भी काम कर रहा है ताकि भविष्य के क्रिप्टोग्राफिक खतरों से बचा जा सके। रेगुलेटर का साफ संदेश है कि फिनटेक कंपनियों को डेटा को सिर्फ एक 'बिजनेस एसेट' नहीं, बल्कि एक 'फिड्यूशरी जिम्मेदारी' मानना होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि लिस्टेड बैंकों और फिनटेक फर्मों का आईटी और कंप्लायंस पर खर्च बढ़ने वाला है। सुरक्षा के सख्त नियमों के चलते कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर असर पड़ सकता है, जिस पर नजर रखना अब जरूरी होगा।
