RBI की चेतावनी: क्लाउड पर अत्यधिक निर्भरता बनी सिस्टम के लिए खतरा, बढ़ सकता है बैंकों का खर्च

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI की चेतावनी: क्लाउड पर अत्यधिक निर्भरता बनी सिस्टम के लिए खतरा, बढ़ सकता है बैंकों का खर्च

Reserve Bank of India (RBI) के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने फाइनेंशियल सेक्टर की कुछ चुनिंदा क्लाउड और टेक प्रोवाइडर्स पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चेतावनी दी है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में बैंकों पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को डायवर्सिफाई करने का दबाव बढ़ेगा, जिससे IT खर्च में बढ़ोतरी तय है।

RBI ने मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' के दौरान फाइनेंशियल सेक्टर की बढ़ती टेक्नोलॉजी निर्भरता पर कड़ा रुख अपनाया है। डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने साफ किया कि हालांकि डिजिटल एडॉप्शन से काम आसान हुआ है, लेकिन इसने सिस्टम में 'कंसंट्रेशन रिस्क' (Concentration Risk) पैदा कर दिया है।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

ज्यादातर बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां क्लाउड स्टोरेज, डेटा प्रोसेसिंग और AI-आधारित एनालिटिक्स के लिए गिनी-चुनी कंपनियों पर निर्भर हैं। RBI का मानना है कि अगर किसी एक बड़े टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर के सर्वर में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो इसका असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी बैंकिंग प्रणाली ठप हो सकती है।

AI की गति और अस्पष्टता (Opacity)

डिप्टी गवर्नर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टोकेनाइजेशन की जटिलताओं पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि AI एल्गोरिदम जिस रफ्तार से फैसले लेते हैं, उसे इंसानी सुपरवाइजर के लिए मॉनिटर करना नामुमकिन है। साथ ही, इन मॉडल्स के काम करने का तरीका (Opacity) भी स्पष्ट नहीं है, जिससे किसी भी गड़बड़ी को समय रहते पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

जवाबदेही बैंकों की ही होगी

RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपनी IT संबंधी जिम्मेदारियों को थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर नहीं डाल सकते। यदि तकनीकी खामी के कारण कोई समस्या खड़ी होती है, तो जवाबदेही पूरी तरह से बैंक की ही होगी।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

आने वाले महीनों में बैंकों को अपने सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए मल्टी-क्लाउड स्ट्रैटेजी और रिडंडेंट सिस्टम पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। शेयरधारकों को ध्यान रखना होगा कि:

  1. बैंकों के IT खर्च (Capex) में इजाफा हो सकता है, जिसका असर मार्जिन पर पड़ सकता है।
  2. RBI के नए सर्कुलर्स और गाइडलाइंस पर नजर रखें, जो वेंडर मैनेजमेंट और साइबर-रेजिलिएंस को लेकर जारी किए जा सकते हैं।
  3. तिमाही नतीजों के दौरान मैनेजमेंट की कमेंट्री में 'रिस्क मिटिगेशन' और IT बजट को लेकर क्या कहा जा रहा है, यह देखना अहम होगा।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.