Reserve Bank of India (RBI) ने बैंकों को आगाह किया है कि वे अपना प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के चक्कर में क्रेडिट स्टैंडर्ड्स के साथ समझौता न करें। सिस्टम में बढ़ती लिक्विडिटी के बीच बैंकों की ओर से NBFC सेक्टर में तेजी से हो रही फंडिंग पर रेगुलेटर ने चिंता जताई है।
मुनाफे की भूख और बढ़ता जोखिम
बैंकों के पास इस समय FCNR डिपॉजिट्स और अन्य स्रोतों से भारी मात्रा में कैश उपलब्ध है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने साफ कर दिया है कि बैंकों को इस अतिरिक्त नकदी को खपाने के लिए जोखिम भरे लोन देने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर लेंडिंग नियमों में ढील दी गई, तो आने वाले समय में ये लोन Non-Performing Assets (NPA) यानी बैड लोन में बदल सकते हैं, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट पर बुरा असर पड़ेगा।
NBFC सेक्टर पर आरबीआई की नजर
केंद्रीय बैंक ने विशेष रूप से बैंकों द्वारा NBFC सेक्टर को दिए जा रहे कर्ज पर आपत्ति जताई है। आरबीआई के मुताबिक, बैंकों की तरफ से NBFC को दिया जाने वाला कर्ज देश की कुल क्रेडिट ग्रोथ से कहीं अधिक रफ्तार से बढ़ रहा है। रेगुलेटर को डर है कि फिनटेक कंपनियों के जरिए बैंक अप्रत्यक्ष रूप से उन कर्जदारों को फंड दे रहे हैं, जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल काफी कमजोर है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
आरबीआई लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए बॉन्ड सेल्स जैसे कदम उठा रहा है, लेकिन बैंकों को खुद भी अनुशासन बरतना होगा। आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों के Quarterly Results के दौरान बैंक मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी ग्रोथ और लोन पोर्टफोलियो की हेल्थ के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं।
