Reserve Bank of India (RBI) ने अकाउंट एग्रीगेटर्स (AA) को कड़ी चेतावनी दी है। रेगुलेटर ने साफ किया है कि कस्टमर का डेटा पवित्र है और इसका इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए नहीं किया जा सकता।
डेटा की शुद्धता और प्राइवेसी पर RBI का कड़ा रुख
केंद्रीय बैंक अब अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम में डेटा की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। 'Samvaad 2026' कॉन्फ्रेंस के दौरान RBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के. रामचंद्रन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी एग्रीगेटर को ग्राहकों के सेंसिटिव फाइनेंशियल डेटा को भुनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। AA फ्रेमवर्क का बेसिक आधार ही 'डेटा-ब्लाइंड' होना है, यानी एग्रीगेटर्स न तो डेटा को स्टोर कर सकते हैं, न ही उसे डिक्रिप्ट कर सकते हैं। बिना स्पष्ट सहमति के डेटा का कोई भी इस्तेमाल गैर-कानूनी माना जाएगा।
स्टैंडर्डाइजेशन और इंटरऑपरेबिलिटी की तैयारी
प्राइवेसी के अलावा, RBI अब टेक्निकल सिस्टम्स को स्टैंडर्डाइज करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसका मकसद फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन प्रोवाइडर्स (FIPs) और फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन यूजर्स (FIUs) के बीच डेटा एक्सचेंज को पूरी तरह सीमलेस बनाना है। इससे छोटे एग्रीगेटर्स को भी बड़े खिलाड़ियों के सामने टिकने का मौका मिलेगा। इस काम में ReBIT और Sahamati की मदद ली जा रही है, ताकि 19 से ज्यादा फाइनेंशियल डेटा कैटेगरी को एक समान फॉर्मेट में लाया जा सके।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का चौथा स्तंभ
के. रामचंद्रन ने अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क को देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का चौथा बड़ा स्तंभ बताया है, जो JAM ट्रिनिटी, UPI और ULI के साथ खड़ा है। अब इस नेटवर्क में डिपॉजिटरी डेटा को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे निवेशकों को अपने डीमैट और फाइनेंशियल होल्डिंग्स का पूरा विवरण एक ही जगह मिल सकेगा। RBI अब इस इकोसिस्टम में 'रेसिप्रोसिटी' यानी परस्पर सहयोग की भी उम्मीद कर रहा है, ताकि फाइनेंशियल डेटा का लाभ उठाने वाली संस्थाएं खुद भी डेटा प्रोवाइडर के तौर पर योगदान दें।
