सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद RBI ने 'मनी-म्यूल' फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। 1 अप्रैल 2027 से संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल **₹1,000** से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी।
नियम में क्या है बदलाव?
RBI ने 11 सितंबर, 2026 को 'Know Your Customer' (KYC) नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। अब तक संदिग्ध गतिविधि मिलने पर बैंक पूरा अकाउंट ब्लॉक कर देते थे, जिससे आम ग्राहकों को काफी परेशानी होती थी। नए नियमों के तहत अब केवल संदिग्ध ट्रांजैक्शन (जो ₹1,000 या उससे ज्यादा का हो) पर 60 दिन तक का 'डेबिट होल्ड' लगाया जा सकेगा।
प्रक्रिया और टाइमलाइन
इस सिस्टम में ग्राहकों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा:
- 20 दिन: ट्रांजैक्शन फ्लैग होने के बाद ग्राहक को अपना पक्ष रखने के लिए मिलेंगे।
- 10 दिन: बैंक को इस अवधि के भीतर प्राप्त दस्तावेजों की जांच पूरी करनी होगी।
बैंकों पर क्या होगा असर?
इस बदलाव के कारण बैंकों के लिए ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ेंगी। बैंकों को अब अपने मॉनिटरिंग सिस्टम में AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना होगा। इसका सीधा असर बैंकों के ऑपरेटिंग एक्सपेंस पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना होगा।
हालांकि, बैंकों के लिए 'फॉल्स पॉजिटिव' का जोखिम भी बना रहेगा, जहाँ सही ट्रांजैक्शन को भी गलती से संदिग्ध माना जा सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि बैंक इन बढ़ते हुए कंप्लायंस खर्चों को कैसे मैनेज करते हैं और क्या यह नई तकनीक वाकई में साइबर क्राइम की दर को कम कर पाती है।
