Brent crude के भाव **$100** प्रति बैरल के पार निकल गए हैं, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। **5-7 अक्टूबर, 2026** को होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले महंगाई बढ़ने का डर निवेशकों को डरा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई यह उछाल RBI के लिए एक बड़ी दुविधा लेकर आई है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25% पर है और केंद्रीय बैंक को अब देश की इकोनॉमिक रिकवरी को बिना नुकसान पहुंचाए महंगाई को काबू में रखने की चुनौती का सामना करना होगा।
इकोनॉमी पर गहरा असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है। रुपये की कमजोरी—जो फिलहाल 95.87 के स्तर के करीब है—इस समस्या को और गंभीर बना रही है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि महंगाई दर 6.5% के स्तर तक जा सकती है। ऐतिहासिक डेटा बताते हैं कि क्रूड में $10 की बढ़ोतरी से भारत की जीडीपी ग्रोथ क्षमता 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक कम हो सकती है।
एक्सपर्ट्स की राय और बाजार का डर
State Bank of India के जानकारों का मानना है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए 50 बेसिस पॉइंट की बढ़त जरूरी है, जिसे अक्टूबर और दिसंबर की मीटिंग्स में बांटा जा सकता है। हालांकि, बाजार का एक वर्ग आगाह कर रहा है कि जल्दबाजी में दरों में बढ़ोतरी से 19.3% की क्रेडिट ग्रोथ धीमी हो सकती है, जो बिजनेस एक्सपेंशन को रोक सकती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
पेंट्स, केमिकल्स और एविएशन जैसे सेक्टर्स के लिए यह दौर मुश्किल हो सकता है क्योंकि कच्चे तेल के महंगे होने से इनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो मुनाफे में गिरावट तय है। वहीं, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि बढ़ती ब्याज दरें लोन की डिमांड को कैसे प्रभावित करती हैं। निवेशकों को अब RBI की अगली कमेंट्री और कंपनियों की आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
